वन मंडलाधिकारी ने वन परिक्षेत्र का किया निरीक्षण, जांच के लिए बनाए दो दल, फर्नीचर मार्ट की भी होगी जांच…

– अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
लाड़कुई वन परिक्षेत्र कई दिनो से लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। जिसके चलतें वन मंडलाधिकारी (सामान्य) सीहोर के द्वारा दोनों ही वन परिक्षेत्र की जांच के लिए दो दल तैयार किये हैं जो वनों में जाकर अनियमित्ता की जांच करेंगे। इस दौरान यदि वन संपदा को नुकसान पहुंचाने व अवैध कटाई के मामले सामने आते हैं तो जिम्मेदारों पर गाज गिरना भी तय हैं। इस मामले में स्वयं डीएफओ मंगलसिंह डाबर के द्वारा दो बार वन परिक्षेत्रों में पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया जा चुका है और उसके बाद ही उन्होंने चार-चार सदस्यी दो दलों का गठन किया है। निरीक्षण के दौरान वन परिक्षेत्र की सीमा में खुले फर्नीचर मार्ट के लायसेंस के संबंध में भी उन्होंने वन परिक्षेत्र अधिकारियों को निर्देशित किया है। 

   हालांकि इस मामले में वन संपदा को बचाने के लिए दल के द्वारा कितनी ईमानदारी के साथ काम किया जाता हैं यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। उल्लेखनीय हैं कि रेहटी वन परिक्षेत्र के तहत आने वाले चकल्दी सर्किल में फर्नीचर मार्ट के नाम पर आरामशीनों का संचालन होने की जानकारी सामने आई थी। इस मामले को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। जिसके चलतें अधिकारियों ने वन परिक्षेत्र में पहुंचकर जांच भी की थी। लेकिन जांच में वन अमले ने फर्नीचर माटों को क्लीन चिट दे दी थी। इसके अतिरिक्त रेहटी नगर में संचालित होने वाली आरामशीनों में लगातार अनियमित्ता की बातें सामने आने के बाद भी वन परिक्षेत्र अधिकारी के द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किये जाने से मामला लगातार संदेहस्प्रद बना हुआ है। यहां पर रात के अंधेरे में नियमों को दरकिनार कर मशीनों का संचालन भी बैखोफ तरीके से किया जाता है। इसके बाद डीएफओ ने जांच के आदेश जारी किये थे। वन मंडलाधिकारी ने बताया कि उनके द्वारा वन परिक्षेत्र अधिकारियों को समय-समय पर जांच किये जाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन यदि लापरवाही हो रही हैं तो कार्यवाही की जाएगी।

10 किमी. के दायरे में खुले फर्नीचर मार्ट के लायसेंसों की होगी जांच-

राजपत्र में प्रकाशित वनों के नोटिफिकेशन के अनुसार वन परिधि में 10 किमी. के दायरें फर्नीचर मार्ट सहित आरामशीनों का संचालन शासन के नियमों के विरूद्ध है। ऐसे में चकल्दी, रेहटी, लाड़कुई में खुले फर्नीचर माटों की जांच की जाएगी। इनके लायसेंस विधिवत् जारी हुए हैं या नहीं। यदि लायसेंस जारी करने में नियमों की अनदेखी की गई हैं तो उन्हें निरस्त करने के साथ ही संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों पर भी गाज गिरना तय है। इस मामले में चकल्दी व लाड़कुई में संचालित फर्नीचर माटों पर वन परिक्षेत्र अधिकारियों की कितनी मेहरबानी हैं यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

पहले ऊर्जावन योजना के तहत लगाए आंवले के 250 पौधे, अब हो रही खेती-

वन विभाग द्वारा वर्ष 2017-18 में ऊर्जावन योजनान्तंगत पिपलानी सबरेंज को किशनपुर बीट में 05 हैक्टेयर वन भूमि को ऊर्जावन का नाम देते हुए, 250 आवंले के पौधे रोपित किये गए थे। लेकिन अब इन पौधों को नष्ट कर यहां पर खेती की जा रही है। यह मामला सामने आने के बाद अब वन विभाग के अधिकारी जबाव देने की स्थिति में भी नहीं दिखाई दे रहे है। ऊर्जावन के नाम पर आंवले के पौधे लगाने सहित 03 लाख का खर्च आया था। लेकिन सूत्र बतातें हैं कि किशनपुर के ग्रामीणों के द्वारा अब इस क्षेत्र पर कब्जा कर खेती की जा रही है।

10 वर्ष पहले निगम को सौंपी बीट में वन विभाग का नाकेदार मर्जी से पदस्थ-

सूत्र बतातें हैं कि लगभग 10 साल पहले वन विकास निगम को भिलाई बीट का एक हिस्सा हस्तांतरित किया जा चुका हैं। लेकिन यहां पर वन सामान्य का एक बीटगार्ड आज भी मर्जी से पदस्थ हैं। रेंजर के मुताबिक निगम को यहां पर बना हुआ भवन हस्तांतरित नहीं किया है।

सवाल यह उठता है कि जब भिलाई में वन विभाग की कोई बीट हैं ही नहीं तो फिर वहां पर नाकेदार किस आधार पर पदस्थ है। इस मामले में लाड़कुई रेंजर प्रकाश चंद्र उइके के द्वारा संबंधित नाकेदार का किशनपुर बीट में पदस्थ होने की बात कहीं है, लेकिन अभी भी नाकेदार भिलाई बीट पर ही मौजूद है।

वन मंडलाधिकारी मगनसिंह डाबर का कहना है कि लाड़कुई व रेहटी क्षेत्र में वनों की अवैध कटाई की लगातार मिल रही शिकायत के बाद मेरे द्वारा दो दलों का गठन किया गया है, जिनके द्वारा वन, आरामशीन व फर्नीचर मार्ट की जांच कर रिपोर्ट सौंपी जाएगी। किशनपुर बीट के ऊर्जावन में यदि आवंले के पौधे नष्ट किये गए हैं तो उसकी भी जांच कराई जाकर संबंधितों खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!