तब साइकिल पर संघर्ष… आज महंगाई पर मौन !”
कहा जनता पूछती है, सवाल…
अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
भेरूंदा – एक समय था जब पेट्रोल 65 रुपये लीटर होने पर भाजपा के बड़े नेता और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान जी साइकिल लेकर सड़कों पर उतर जाते थे। महंगाई को लेकर धरना, प्रदर्शन, फोटोशूट और बड़े-बड़े भाषण दिए जाते थे। जनता को बताया जाता था कि बढ़ते डीजल-पेट्रोल के दाम गरीब, किसान और मध्यमवर्ग की कमर तोड़ रहे हैं।

लेकिन आज वही पेट्रोल 112 रुपये के पार पहुंच चुका है। डीजल, गैस सिलेंडर, राशन, शिक्षा, दवाइयां और रोजमर्रा की हर चीज महंगी हो चुकी है। किसान परेशान है, युवा बेरोजगारी से जूझ रहा है, मध्यमवर्ग का बजट बिगड़ चुका है और गरीब परिवारों का घर चलाना मुश्किल हो गया है, लेकिन सत्ता में बैठे नेताओं की संवेदनाएं जैसे खत्म हो गई हैं। ऐसै कई आरोप लगाते हुए। कांग्रेस ने विक्रम मस्ताल ने कहा कि आज वही नेता जनता को पैदल चलने और साइकिल चलाने की सलाह दे रहे हैं।
जनता पूछ रही है —
क्या उस समय की साइकिल यात्रा सिर्फ कैमरों और राजनीति के लिए थी?
क्या महंगाई सिर्फ विपक्ष में रहते हुए ही दिखाई देती है?क्या सत्ता में आते ही जनता का दर्द दिखाई देना बंद हो जाता है?
एक तरफ देश की जनता महंगाई की मार झेल रही है, दूसरी तरफ सत्ता के नेता बड़ी-बड़ी गाड़ियों के काफिले, एसी दफ्तरों और मंचों से उपदेश दे रहे हैं।
