मेरे क्षेत्र में जुल्म की पराकाष्ठा हुई है–केंद्रीय कृषि मंत्री…
प्रभावित परिवार को 25-25 हजार की सहायता का ऐलान; बोले—जिनके घर तोड़े गए, उन्हें बनाकर देंगे नए मकान…
वन विकास निगम द्वारा ग्रामीणो के आरोप को बताया गलत…
अमित शरमा लाड़कुई/भैरूंदा
भैरूंदा – बुधनी विधानसभा क्षेत्र के भैरूंदा अंतर्गत आने वाले ग्राम कोसमी में रविवार को वन विकास निगम द्वारा वन भूमि पर किए अतिक्रमण को लेकर बड़ी कार्यवाही की गई, जिसमे अतिक्रमणकारियो द्वारा बनाए गए टप्पर ओर खड़ी फसल पर जेसीबी चलाकर नष्ट किया।
वन विकास निगम द्वारा की गई कार्यवाही की सूचना मिलते ही बुधनी विधानसभा के विधायक रमाकांत भार्गव गांव वालों के बीच पहुंचे और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से बात की, वही केंद्रीय मंत्री भी दो से तीन घंटे बाद आदिवासी हो के बीच पहुंचे।
रविवार देर शाम कोसमी पहुंचे शिवराज सिंह चौहान ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। महिलाओं की पीड़ा सुनकर वह भावुक हो गए। उन्होंने मौके से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर नाराजगी जताई और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे। जब तक स्थायी आवास की व्यवस्था नहीं होती, तब तक प्रभावित परिवारों के रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था भी की जाएगी। उन्होंने प्रत्येक प्रभावित परिवार को 25-25 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा भी की। उन्होंने मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर मामले में अपनी आपत्ति दर्ज कराई। साथ ही भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। श्री चौहान ने कहा कि वह इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे और प्रभावित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों को इस तरह बेघर करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय होनी चाहिए और मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
लगाए आरोप, टप्परो के साथ फसलो को किया नष्ट…

ग्रामीणों के मुताबिक, रविवार सुबह करीब 09 बजे वन विकास निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने कार्रवाई शुरू की, जो दोपहर करीब 1:30 बजे तक चली कार्रवाई के दौरान करीब 12 आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने की बात सामने आई है। ग्रामीणों ने मक्के और तुअर की फसलों को नष्ट करने तथा सिंचाई और पेयजल के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भरने का भी आरोप लगाया है। इन परिस्थितियों ने प्रभावित परिवारों के सामने आवास के साथ भोजन, पानी और आजीविका का संकट खड़ा कर दिया है। शिवराज सिंह चौहान ने फसलों को नुकसान पहुंचाने और कुएं को मिट्टी से भरने की कार्रवाई पर भी कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को अकेला नहीं छोड़ा जाएगा और उनकी जरूरतों के लिए तत्काल व्यवस्था की जाएगी।
महिलाओं की पीड़ा सुनकर भावुक हुए शिवराज…

पीड़ित परिवारों से मुलाकात के दौरान महिलाओं ने अपने घर टूटने और परिवार के सामने खड़े हुए संकट की जानकारी दी। उनकी पीड़ा सुनकर केंद्रीय मंत्री भावुक हो गए। उन्होंने कहा कि नवरात्रि के पहले दिन इस तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष के संकल्प के साथ राजनीति शुरू की थी और गरीबों के साथ होने वाले ऐसे अन्याय को सहन नहीं करेंगे।
23 साल से काबिज होने का किया दावा, पहले दिया था नोटिस…

प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार सीहोर परियोजना मंडल के संभागीय प्रबंधक तरुण कुमार कौरव ने 7 सितंबर 2026 को बेदखली संबंधी आदेश जारी किया था। इसमें परियोजना परिक्षेत्र लाड़कुई के आरक्षित वन क्षेत्र के कक्ष क्रमांक 426 में अतिक्रमण का उल्लेख है। आदेश में सात दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाकर वन भूमि को मूल स्वरूप में लाने के निर्देश दिए गए थे। वही दूसरी ओर, प्रभावित परिवारों ने वन विकास निगम के संभागीय प्रबंधक को सौंपे गए ज्ञापन में दावा किया था कि वह पिछले करीब 23 वर्षों से भूमि पर काबिज होकर खेती कर रहे हैं और इसी से परिवारों का भरण-पोषण होता है। उनका कहना था कि बेदखली से उनके सामने गंभीर आजीविका संकट खड़ा हो जाएगा।
कर्मचारियों पर मारपीट और मोबाइल छीनने का आरोप…

मामले ने उस समय और गंभीर रूप ले लिया जब ग्रामीणों ने वन विकास निगम के कर्मचारियों पर गाली-गलौज, मारपीट, जान से मारने की धमकी देने और मोबाइल फोन छीनने के आरोप लगाते हुए लाड़कुई चौकी में शिकायत दी। शिकायत में कहा गया है कि 10 अक्टूबर को खेतों में काम करते समय वन विकास निगम की रेंजर जया यादव अपने स्टाफ के साथ मौके पर पहुंचीं। इसके बाद विवाद हुआ और कथित तौर पर ग्रामीणों के मोबाइल फोन छीन लिए गए। शिकायतकर्ताओं ने पुलिस से मामले की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।
वन विकास निगम द्वारा ग्रामीणो के आरोप को बताया गलत…

वही वन विकास निगम के सीहोर परियोजना मंडल के संभागीय प्रबंधक तरुण कुमार कौरव ने सभी आरोपो को गलत बताया उन्होने कहा कि 5 से 6 स्थानो पर कार्यवाही की गई है, इस दौरान हमारे स्टाफ द्वारा किसी प्रकार की कोई मारपीट नहीं की गई है और आदेश के साक्षर पालन किया गया है, जिस प्रकार के आदेश वरिष्ठ कार्यालय से दिए गए थे उसके परिपालन में यह कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि 2021 में यहां पर एक प्लांटेशन किया गया था, सैटेलाइट इमेज में यह पूरा वन क्षेत्र था, उसके बाद 2022 में इनके द्वारा धीरे-धीरे अतिक्रमण किया गया, जिसको लेकर लगातार विभाग द्वारा वैधानिक कार्रवाई करते हुए, पीआर काटे गए, इन्हें नोटिस जारी किए गए, न्याय में चालान पेस किया गया। वही इन्हे धारा 80 के तहत दौवारा नोटिस जारी किए गए, वही समय रहते बताया गया, कि इस क्षेत्र से स्वयं ही हट जाए, जब इनके द्वारा इस क्षेत्र को नहीं छोड़ा गया, तो फिर बेदखली की कार्रवाई की गई।
