न लाइट की व्यवस्था, न सड़क का इंतजाम; अतिक्रमण के चलते रास्ता भी बाधित, शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार बेखबर…
अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरूंदा । क्षेत्र के ग्राम लाड़कुई अंतर्गत ग्राम रफीकगंज सीप नदी पर दुर्गा प्रतिमा विसर्जन घाट पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमी के चलते श्रद्धालुओं को हर साल परेशानियों का सामना करना पड़ता है। घाट तक पहुंचने के लिए न तो समुचित सड़क की व्यवस्था है और न ही पर्याप्त रोशनी का इंतजाम रहता है। ऐसे में अव्यवस्थाओं के बीच प्रतिमाओं का विसर्जन करना जोखिम भरा साबित हो सकता है। यदि समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं की गईं, तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

रफीकगंज सीप नदी पर प्रतिवर्ष मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इस बार भी आधा दर्जन से अधिक दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की जाने की संभावना है। इसके बावजूद विसर्जन घाट तक पहुंचने वाले मार्ग की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। प्रतिमाओं से भरी ट्रॉलियों को घाट तक ले जाने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
अतिक्रमण के चलते रास्ता बाधित –
विसर्जन घाट तक पहुंचने के मार्ग पर अतिक्रमण के कारण परेशानी और बढ़ गई है। आरोप है कि अतिक्रमणकारियों ने रास्ते को बाधित कर दिया है, जिससे श्रद्धालुओं और प्रतिमाओं को लेकर जाने वाली ट्रॉलियों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। त्योहार के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आवाजाही को देखते हुए, यह स्थिति गंभीर चिंता का विषय है।
कई वर्षों से शिकायत, फिर भी नही हुई कार्यवाही –
स्थानीय लोगों के अनुसार, घाट तक जाने वाले रास्ते और आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को कई वर्षों से अवगत कराया जा रहा है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। न सड़क की उचित व्यवस्था की गई और न ही रात के समय विसर्जन के लिए पर्याप्त रोशनी का इंतजाम किया जाता है।
प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग –
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन से पहले घाट तक जाने वाले मार्ग को दुरुस्त कराया जाए, रास्ते से अतिक्रमण हटाया जाए और पर्याप्त लाइट की व्यवस्था की जाए, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित तरीके से प्रतिमाओं का विसर्जन कर सकें।
अब सवाल यह है कि जब हर वर्ष इसी घाट पर प्रतिमाओं का विसर्जन होता है और समस्याओं की जानकारी भी जिम्मेदारों को है, तो फिर अब तक स्थायी समाधान क्यों नहीं किया गया। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर समय रहते व्यवस्थाओं को दुरुस्त कर श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी ?
