सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा का दूसरा दिन: तराना रोड उज्जैन से देवास के सिंदुरिया तक पदयात्रा करेंगे दिग्विजय सिंह…

अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
उज्जैन। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा बुधवार को दूसरे दिन आगे बढ़ेगी। विजयादशमी के पावन अवसर पर उज्जैन से भव्य शुभारंभ के बाद यात्रा अब देवास जिले के सिंदुरिया गांव की ओर प्रस्थान करेगी। दिग्विजय सिंह साधु-संतों और अन्य सहभागियों के साथ पदयात्रा करते हुए सत्य, न्याय, सदाचार और धार्मिक स्थलों में पारदर्शिता का संदेश लेकर आगे बढ़ेंगे।

करीब 930 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा उज्जैन से शुरू होकर ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या में भगवान श्रीराम के धाम तक पहुंचेगी। यात्रा के पहले दिन उज्जैन में वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और साधु-संतों के जयघोष के बीच इसका भव्य शुभारंभ हुआ था। यात्रा में देशभर से आए सैकड़ों साधु-संत शामिल हुए हैं।

निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक, दूसरे दिन बुधवार को पदयात्रा उज्जैन के तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू होगी। यहां से पिंगलेश्वर जोड़, नाहरिया जोड़, सायराखेड़ी, देवनखेड़ी, ताजपुर जोड़, गुनाई खालसा, रुदाहेड़ा और राधा स्वामी सत्संग न्यास होते हुए यात्रा देवास जिले के सिंदुरिया गांव पहुंचेगी। इस दिन करीब 16.5 किलोमीटर की पदयात्रा निर्धारित है। ताजपुर जोड़ पर दोपहर के भोजन और विश्राम के बाद यात्रा आगे बढ़ेगी। रात में सिंदुरिया गांव में विश्राम होगा।

यात्रा के शुभारंभ से पहले दिग्विजय सिंह ने उज्जैन के चिंतामन गणेश मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर और हरसिद्धि मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। इसके बाद नृसिंह घाट के समीप बालाजी गार्डन में असंख्य पार्थिव शिवलिंगों के निर्माण, पूजन और अभिषेक का अनुष्ठान आयोजित किया गया। धार्मिक अनुष्ठानों के बाद साधु-संतों की मौजूदगी में पदयात्रा शुरू हुई।

सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के प्रमुख उद्देश्यों में धार्मिक स्थलों पर दान और चढ़ावे की व्यवस्था में पारदर्शिता, मंदिरों की संपत्तियों एवं निर्माण कार्यों से जुड़ी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और लोकतंत्र में मताधिकार की रक्षा को लेकर जनजागरण शामिल है। यात्रा को ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती सहित कई संतों का समर्थन और आशीर्वाद भी मिला है।

उज्जैन से अयोध्या तक की यह पदयात्रा लगभग 70 दिनों में पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है। आयोजकों के मुताबिक, यात्रा के दौरान विभिन्न गांवों और नगरों में स्थानीय नागरिकों, श्रद्धालुओं, किसानों और समाज के अलग-अलग वर्गों से संवाद भी किया जाएगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!