भैरुंदा क्षेत्र में मिट्टी उत्खनन माफिया बेलगाम, राजस्व-खनिज विभाग मौन, मिली भगत की आशंका…

ग्राम नीलकंठ में धड़ल्ले से चल रहा अवैध मिट्टी उत्खनन, रेलवे कार्य के नाम पर खनन, राजस्व का भारी नुकसान…

रात के अंधेरे में हो रहा अवैध उत्खनन प्रशासन मौन – कांग्रेस का आरोप….

भेरूंदा – बुदनी विधान सभा के भैरुंदा क्षेत्र में इन दिनों अवैध मिट्टी खनन का खेल चरम पर है। माफिया खुलेआम प्रशासन को चुनौती देते हुए मिट्टी का उत्खनन और परिवहन कर रहे हैं, जिससे शासन को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है।

वही ताजा मामला भैरुंदा तहसील के ग्राम नीलकंठ का बताया जा रहा है, जहां बिना किसी डर के लगातार उत्खनन जारी है। बताया जा रहा है कि यह मिट्टी रेलवे कार्य में उपयोग के लिए जा रही है, लेकिन अनुमति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

वही सूत्रों के मुताबिक, उत्खनन की गई मिट्टी रेलवे प्रोजेक्ट में उपयोग की जा रही है, लेकिन राजस्व को इसका कोई लाभ नहीं मिल रहा। खनिज विभाग रेत खनन पर तो कार्यवाही करता है, लेकिन मिट्टी और कोपरा खनन पर चुप्पी कई सवालो को जन्म दे रहा है। वहीं राजस्व व माइनिंग विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के घेरे में है, जिससे मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है।

भैरुंदा के ग्राम नीलकंठ में अवैध मिट्टी खनन लगातार जारी है। यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जो हादसों को न्योता दे रहे हैं। स्थानीय सरपंच संतोष वर्मा के अनुसार, उत्खनन के कारण क्षेत्र में खतरनाक स्थिति बन गई है और हाल ही में एक वन प्राणी (हिरण) भी इसका शिकार होकर गड्ढे में गिर गया था। सरपंच का कहना है कि ग्राम पंचायत से कोई अनुमति नहीं ली गई, जबकि खनन करने वाले परमिशन होने का दावा कर रहे हैं। वही जब इस पूरे मामले पर स्थानीय पटवारी व तहसीलदार से बात की गई तो वहा भी इस मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मिट्टी के अवैध उत्खनन पर कार्यवाही करने का अधिकार खनिज विभाग को है।

वही कांग्रेस प्रवक्ता गोपाल शर्मा ने क्षेत्र में हो रहे, मिट्टी व कोपरे के अवैध उत्खनन पर सरकार सहित प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल खड़े किये है, उनका कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की मिली भगत से पूरा खेल चल रहा है। अगर जल्द कार्यवाही नही की गई तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी।

वही अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में कब तक कार्यवाही करता है, या फिर माफिया इसी तरह खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते रहेंगे।

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