छात्र-छात्राओं को दिया सुरक्षित डिजिटल स्पेस और साइबर सुरक्षा का मंत्र…
अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
सीहोर- पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार जिला पुलिस द्वारा महिलाओं और युवाओं की साइबर सुरक्षा व डिजिटल सुरक्षा को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से चलाए जा रहे “सेफ क्लिक 2.0 अभियान” के दूसरे दिन, थाना मंडी अंतर्गत सेंट मेरी हायर सेकेंडरी स्कूल में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक सीहोर, श्रीमती सोनाक्षी सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित रहीं।

इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीहोर श्रीमती सुनीता रावत, एसडीओपी सीहोर सुश्री पूजा शर्मा, सूबेदार बृजमोहन धाकड़, साइबर सेल प्रभारी सुशील साल्वे तथा स्कूल प्रबंधन, प्राध्यापकगण और भारी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

पुलिस अधीक्षक श्रीमती सोनाक्षी सक्सेना ने कार्यक्रम में संबोधित करते हुए वर्तमान दौर में डिजिटल सुरक्षा की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि आज के डिजिटल युग में इंटरनेट और सोशल मीडिया हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन थोड़ी सी लापरवाही हमें साइबर अपराधियों का शिकार बना सकती है। ‘सेफ क्लिप अभियान’ का उद्देश्य आप सभी को जागरूक और सशक्त बनाना है ताकि कोई भी आपके वीडियो, फोटो या निजी डेटा का दुरुपयोग न कर सके।

पुलिस अधीक्षक द्वारा सांझा किए गए मुख्य बिंदु…
सोशल मीडिया का सुरक्षित उपयोग:
अपनी निजी तस्वीरें, वीडियो (क्लिप्स) और संवेदनशील जानकारियां अनजान लोगों के साथ साझा न करें।
मजबूत प्राइवेसी सेटिंग्स:
अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (2FA) और प्राइवेसी सेटिंग्स को हमेशा ऑन रखें।
ब्लेकमेलिंग के खिलाफ आवाज उठाएं:
यदि कोई आपको किसी क्लिप या फोटो के जरिए डराने या ब्लैकमेल करने की कोशिश करता है, तो डरे नहीं, तुरंत संबंधित थाना या साइबर सेल से संपर्क करें।

साइबर हेल्प डेस्क और शिकायत प्रक्रिया की दी जानकारी…
कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सीहोर श्रीमती सुनीता रावत एवं एसडीओपी सीहोर सुश्री पूजा शर्मा तथा थाना साइबर विशेषज्ञों द्वारा छात्र-छात्राओं को प्रैक्टिकल टिप्स दिए गए। विद्यार्थियों को बताया गया कि साइबर फ्रॉड या किसी भी प्रकार के ऑनलाइन उत्पीड़न की स्थिति में तत्काल राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर, NCRP पोर्टल पर या स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। पुलिस द्वारा पीड़ित की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
स्कूल प्रबंधन ने पुलिस प्रशासन की इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए पुलिस अधीक्षक एवं उनकी टीम का आभार व्यक्त किया।
