क्षतिग्रस्त स्कूल, छत से टपकता पानी, और रोड पर लगती कक्षाएं…
अमित शर्मा, लाड़कुई/ भैरूंदा
भैरूंदा – अजब एमपी में गजब की शिक्षा व्यवस्था जहां भाजपा नेताओं ने अपने खेत पर जाने के लिए प्रधानमंत्री सड़के बनवा रखी है, लेकिन उसी क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। जिसमें दिखाई दे रहा है कि एक स्कूल के बच्चे रोड पर बैठकर पढ़ते नजर आ रहे हैं, जब मीडिया द्वारा इस वीडियो की पड़ताल की गई तो मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होते दिखाई दे रहे हैं।
ये पूरा मामला बुदनी विधानसभा क्षेत्र के भैरूंदा विकासखंड अंतर्गत आने वाले शासकीय प्राथमिक शाला पांगरी (टप्पर) का है।

ग्रामीणों भागीरथ यादव, नंदकुमार, राजकुमार, मोहन बारेला, द्वारा बताया गया कि शाला भवन लंबे समय से जर्जर अवस्था में था, जिसे शासन द्वारा वर्ष 2022 में कंडम घोषित कर दिया। उसके बाद से ही ग्रामीणों द्वारा लगातार पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से लेकर क्षेत्र के विधायक रमाकांत भार्गव एवं केंद्रीय कृषि मंत्री के पुत्र कार्तिकेय चौहान सहित कई वरिष्ठ नेता और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को बार-बार संज्ञान में लाने के बाद भी आज दिनांक तक स्कूल की बिल्डिंग का निर्माण नहीं हो पाया है। 2022 से ही स्कूल स्थानीय एक व्यक्ति के निजी मकान में अस्थायी रूप से संचालित हो रहा है, लेकिन पिछले तीन वर्षों से मकान मालिक को प्रशासन द्वारा किराया भी नहीं दिया गया। जिसके चलते मकान मालिक ने अपने मकान में स्कूल लगाने से मना कर दिया।
जिसके बाद स्थिति यह निर्मित हुई कि वहां पदस्थ शिक्षिका द्वारा मजबूरी में सड़क पर ही खुले आसमान के नीचे स्कूल संचालित करना पड़ा। जिसका बिडियो ग्रामीणों द्वारा बनाकर सोशल मीडिया पर डालने के बाद जैसे ही मीडिया ग्राउंड जीरो पर पहुंची, तो शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने दूरभाष पर बात कर एवं मकान मालिक को जल्द से जल्द पूरा किराया देने का आश्वास दिया और फिर से उसी मकान में स्कूल संचालित कराया गया।
जब मीडिया ने इस बात को लेकर शिक्षा विभाग के अधिकारियों से दूरभाष पर बात की, तो उन्होंने कहा कि हमारे द्वारा इस संबंध मे वरिष्ठ कार्यालय को अवगत करा दिया गया है। भवन भी स्वीकृत हो गया है, इसके साथ ही निजी भवन किराए के लिए भी पत्र लिखा जा चुका है।
सरकार आदिवासी उत्थान की बाते करती है, तो वही लगभग 04 साल का समय बीत जाने के बाद भी आदिवासी ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों के लिए स्कूल भवन नहीं दे सकी, इस व्यवस्था से आप क्या उम्मीद लगा सकते हैं, ऐसी शिक्षा प्रणाली पर सवाल उठाना तो लाजमी है।
वही अब देखने वाली बात यह है कि कब तक विभाग द्वारा भवन निर्माण की प्रक्रिया चालू होती है, या इसी प्रकार बच्चो को बार-बार सड़क पर बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर होना पड़ेगा।
