सत्ता आपकी, सरकार आपकी, फिर लोकतंत्र को खतरा किससे ? — एक जागरूक नागरिक की आवाज…

अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरूदा– भारतीय जनता पार्टी की मध्य प्रदेश में चल रही ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ रैलियों को देखकर जनता के मन में एक सीधा सवाल उठता है।

जब देश में केंद्र की सरकार आपकी है, मध्य प्रदेश में सरकार आपकी है, मुख्यमंत्री आपका है, प्रशासन आपके अधीन है, तो फिर अराजकता फैल कौन रहा है? लोकतंत्र को खतरा किससे है? और किसे हटाकर देश को बचाना चाहते हैं?

अगर विपक्ष सवाल पूछता है तो उसे लोकतंत्र में अपना अधिकार है। अगर जनता सरकार से रोजगार, महंगाई, शिक्षा, किसानों और युवाओं के भविष्य पर सवाल करती है, तो क्या वह भी अराजकता है?

आज प्रदेश का पढ़ा-लिखा युवा नौकरी के लिए भटक रहा है। बेरोजगार युवा अपना व्यवसाय शुरू करना चाहता है, लेकिन पूंजी नहीं है। बैंक से कर्ज लेने जाता है तो गारंटी और जमानत की शर्तें उसके सामने खड़ी हो जाती हैं। डिग्रियां होने के बावजूद युवाओं के सामने भविष्य का संकट है।

गरीबों को मुफ्त योजनाओं का लाभ दीजिए, लेकिन उनके हाथों को रोजगार भी दीजिए। युवा केवल सहायता नहीं, आत्मनिर्भर बनने का अवसर चाहता है।

सरकार से सवाल है कि प्रदेश में बेरोजगारी दूर करने, युवाओं को रोजगार देने, किसानों की आय बढ़ाने और आम जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए ऐसी कितनी रैलियां निकाली गईं?

लोकतंत्र बचाने की बात करने वालों को यह भी समझना होगा कि लोकतंत्र केवल चुनाव जीतने से नहीं चलता। लोकतंत्र में विपक्ष का सम्मान, जनता की आवाज, संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और सरकार की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।

जनता का सवाल बहुत सीधा है—

अगर अराजकता विपक्ष फैला रहा है तो सरकार कानून और व्यवस्था के माध्यम से जवाब दे। अगर लोकतंत्र खतरे में है तो उसके लिए ठोस प्रमाण और समाधान जनता के सामने रखे जाएं। लेकिन सत्ता में रहकर केवल नारे लगाने से जिम्मेदारियां पूरी नहीं होतीं।

हमें रैलियों से ज्यादा रोजगार चाहिए, नारों से ज्यादा विकास चाहिए, राजनीतिक आरोपों से ज्यादा समाधान चाहिए और मुफ्त योजनाओं के साथ युवाओं को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर चाहिए। याद रखिए, सरकार किसी पार्टी की निजी संपत्ति नहीं होती, सरकार जनता के विश्वास से चलती है।

अंत में एक ही सवाल—

जब सत्ता भी आपकी है और सरकार भी आपकी, तो फिर लोकतंत्र बचाने के लिए जनता से अपील करने से पहले अपनी सरकार से जवाबदेही क्यों नहीं मांगते?

देश को नारों की नहीं, परिणामों की जरूरत है। लोकतंत्र को बचाना है तो पहले जनता का विश्वास बचाइए!

आवाज — एक जागरूक नागरिक की..

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