करोड़ों की सड़क, फिर भी बदहाल लाड़कुई !
अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
लाड़कुई। सीहोर जिले के प्रमुख गांवों में शामिल लाड़कुई में करोड़ों रुपये के विकास कार्यों के बावजूद मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। कोसमी–भैरूंदा मार्ग के लाड़कुई हिस्से में प्राप्त जानकारी के अनुसार लगभग 6.20 करोड़ रुपये की लागत से एक किलोमीटर सड़क का उन्नयन एवं पुनर्निर्माण कराया गया। इसके साथ नाली निर्माण, स्ट्रीट लाइट और सड़क चौड़ीकरण जैसे कार्य भी हुए, लेकिन वर्तमान स्थिति निर्माण की गुणवत्ता और रखरखाव पर सवाल खड़े कर रही है।

अतिक्रमण हटाया, फिर सड़क तक पहुंचे कब्जे –
निर्माण के दौरान सड़क चौड़ीकरण के लिए अतिक्रमण हटाया गया था, लेकिन अब कई जगह दुकानदारों ने फिर चबूतरे, छज्जे और दुकान का सामान सड़क तक बढ़ा दिया है। नालियों पर भी कब्जे किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि अतिक्रमण हटाने में भी समानता नहीं बरती गई। कहीं अधिक निर्माण तोड़ा गया तो कहीं कम, जबकि कुछ दुकानें बचा ली गईं। ग्रामीणों ने निर्माण और अतिक्रमण कार्यवाही की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
बंद स्ट्रीट लाइट और जर्जर पुलिया से दुर्घटना का खतरा –

हाईवे पर लगी स्ट्रीट लाइटें कई दिनों से बंद हैं। चालू लाइटों का प्रकाश भी बेहद कमजोर बताया जा रहा है। वहीं मुख्य नाले की पुरानी पुलिया को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि नई पुलिया बनाने के बजाय पुरानी पुलिया के ऊपर ही निर्माण किया गया, जबकि उसमें सरिये बाहर निकले हुए हैं। पुलिया के आसपास संकरा रास्ता, सब्जी के ठेले और टर्निंग पॉइंट पर कम दृश्यता दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार पिछले वर्ष मंडी गेट चौराहे पर एक हादसे में बच्चे की मौत भी हो चुकी है।

मंडी में किसानों की आवाजाही, चौराहे पर जाम –
व्यस्त हाईवे रोड़ और कृषि उपज मंडी में गतिविधियां बढ़ने से दिनभर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों और भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। मंडी चौराहे पर सब्जी के ठेले, सड़क किनारे खड़े वाहन और दुकानों का सामान यातायात में बाधा बनते हैं। पुलिस चौकी के पास शाम को चाऊमीन, मंचूरियन और फुल्की के ठेले लगने से रास्ता और संकरा हो जाता है। गांव की ओर आने-जाने वाले रास्तों पर पर्याप्त दिशा-सूचक बोर्ड और यातायात संकेतक भी नहीं हैं।
बड़े गांव में यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नहीं –
लाड़कुई में व्यवस्थित बस स्टैंड और यात्रियों के बैठने के लिए प्रतीक्षालय तक नहीं है। सार्वजनिक सुलभ कॉम्प्लेक्स की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। सबसे बड़ी परेशानी यह है कि बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए निःशुल्क पीने के पानी की कोई समुचित सार्वजनिक व्यवस्था नहीं है। लोगों को निजी होटलों और दुकानों पर निर्भर रहना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई जगह नाश्ता या सामान लेने पर ही पानी उपलब्ध हो पाता है। सार्वजनिक प्याऊ और वाटर कूलर जैसी बुनियादी सुविधा का भी अभाव है।
ग्रामीणों ने उठाई जांच और स्थायी समाधान की मांग –
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और संबंधित विभागों से सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच, अतिक्रमण पर समान कार्यवाही, नालियों से कब्जे हटाने, बंद स्ट्रीट लाइट चालू कराने और पुरानी पुलिया की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। साथ ही मंडी चौराहे पर यातायात संकेतक, दिशा बोर्ड, ठेलों के लिए निर्धारित स्थान, किसानों के वाहनों की व्यवस्थित आवाजाही, बस स्टैंड, यात्री प्रतीक्षालय, सुलभ कॉम्प्लेक्स और निःशुल्क पेयजल की व्यवस्था करने की मांग उठाई है।

ग्रामीणों का कहना है कि लाड़कुई आसपास के अनेक गांवों का प्रमुख व्यापारिक और आवागमन केंद्र है। इसके बावजूद यदि यहां सड़क, यातायात, सुरक्षा और यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है तो करोड़ों रुपये के विकास कार्यों का लाभ आम जनता को कैसे मिलेगा? अब ग्रामीणों को केवल निर्माण के दावों की नहीं, बल्कि धरातल पर सुविधाओं और सुरक्षित व्यवस्था की जरूरत है।
