अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
सीहोर- मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित प्रसिद्ध शिव पुराण कथा वाचक प्रदीप मिश्रा के कुबरेश्वर धाम के लिए बुधवार का दिन भी अच्छा नहीं गुजरा, इस दौरान यहां 06 लोगों की मौत हो गई। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को भगदड़ में दो महिलाओं की जान चली गई थी। हालांकि बुधवार को हुई तीन लोगों की मौत की वजह घबराहट और चक्कर आने के साथ हार्ट अटैक को बताई जा रही है। वही आज एक ओर व्यक्ति की मौत होने की खबर प्राप्त हुई है, इस तरह बीते तीन दिनों में कुबेरेश्वर धाम में कुल छः लोगों की मौत हो चुकी है, वहीं कुछ लोगों घायल हुए है जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

बता दें कि सीहोर में पंडित प्रदीप मिश्रा ने बुधवार को भव्य कांवड़ यात्रा का आयोजन किया था, जिसमें शामिल होने देशभर से लाखो की तादाद में श्रद्धालु यह पहुंचे थे।

वही जानकारी के अनुसार सीहोर कावड़ यात्रा में शामिल होने आए लोगों में से लगभग 06 की मौत हो गई, कावड़ यात्रा में लगभग 02 लाख से अधिक श्रद्धालु यह पहुंच ने का अनुमान लगाया जा रहा है, कावड़ यात्रा से एक दिन पहले 05 अगस्त को दो महिलाओं की मौत होने की जानकारी मिली थी, वही अगले दिन 06 अगस्त कावड़ यात्रा में दो पुरुषों की मौत होने की खबर प्राप्त हुई, वही 07 अगस्त को कावड़ यात्रा के 01 दिन बाद एक ओर उत्तर प्रदेश निवासी उपेंद्र गुप्ता उम्र 25 साल की मौत की खबर सामने आई।

कुबेरेश्वर धाम में बुधवार को मारे गए तीन लोगों में से एक की मौत हार्ट अटैक से होना बताया गया। वहीं दो अन्य व्यक्तियों में से एक की मौत कुबेरेश्वर धाम में अचानक चक्कर आकर गिरने से हुई, जबकि दूसरे व्यक्ति की मौत एक होटल के सामने खड़े-खड़े गिर जाने से हुई।
मृतक हुए…
1. जसवंती बेन, गुजरात
2. संगीता, उत्तर प्रदेश
3. चतुर सिंह, गुजरात
4. ईश्र्वर सिंह, हरियाणा
5. दिलीप सिंह, रायपुर छत्तीसगढ
6. उपेंद्र गुप्ता, उत्तर प्रदेश
भगदड़ में सबसे पहले हुई दो महिलाओं की मौत के मामले में मध्य प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए, कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक सीहोर से मामले की जांच कर भीड़ प्रबंधन की क्या व्यवस्था थी, घायलों के इलाज में क्या व्यवस्था की गई, मृतकों को क्या आर्थिक सहायता राशि दी गई, इन सभी मामलो की जांच कर 15 दिवस में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने की बात कही है।

इस पूरे मामले पर कथावाचक प्रदीप मिश्रा का बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा कि व्यवस्था तो समिति भी पूर्ण रूप से करती है, ओर प्रशासन की भी पर्याप्त व्यवस्था रहती है, लेकिन भक्तों का सैलाब जैसे कुंभ मेले में भक्तों पर आधारित रहता है, यह किसी को भी अंदाजा नहीं रहता है कि कितने भक्त पहुंचेंगे, ना प्रशासन को ओर ना ही समिति को, यहां भक्तों का सैलाब आ जाता है।
