अवैध रेत परिवहन पर बवाल, ग्रामीणों ने ट्रैक्टर चालक की कर दी, पिटाई…

बिना रॉयल्टी रेत ले जा रहे ट्रैक्टरों का ग्रामीणों ने किया विरोध, बिडीओ सोशल नेटवर्क पर वायरल

अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरुंदा – अवैध रेत परिवहन को लेकर ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। बिना रॉयल्टी के रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्रामीण रास्ते से निकलने का विरोध करने पर ट्रैक्टर चालक और ग्रामीणों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुंच गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है।
मामला सीहोर जिले के भैरुंदा तहसील के ग्राम छापरी से निमोटा होते हुए बबलीखेड़ा और सनकोटा गांव के ग्रामीण मार्ग का है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस कच्चे रास्ते से प्रतिदिन 50 से 60 रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली बिना रॉयल्टी के गुजरते हैं। जब ग्रामीणों ने ट्रैक्टर चालकों से इस रास्ते से निकलने की अनुमति के बारे में पूछा, तो कथित तौर पर कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई।
ग्रामीणों का कहना है कि ट्रैक्टर चालक ने रोज इसी रास्ते से निकलने की बात कही, जिसके बाद विवाद बढ़ गया और ग्रामीणों ने चालक की पिटाई कर दी। घटना का वीडियो भी सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि भारी वाहनों की आवाजाही से कच्चा रास्ता पूरी तरह खराब हो गया है। इससे बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल ले जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही उनका यह भी आरोप है कि कार्यवाही से बचने के लिए मुख्य मार्ग की बजाय ग्रामीण रास्तों का इस्तेमाल किया जाता है। घटना की सूचना मिलने पर नायब तहसीलदार मौके पर पहुंचे और बिना रॉयल्टी के रेत परिवहन कर रहे तीन ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त कर उन्हें लाड़कुई चौकी में खड़ा कराया। अब बड़ा सवाल यही है कि बिना रॉयल्टी रेत से भरे ट्रेक्टर-ट्रॉली पर प्रभावी रोक कब लगेगी।

बिना रॉयल्टी ट्रैक्टर ट्रॉली रेत परिवहन पर प्रशासन की चुप्पी, खमियाजा भुगत रहे ग्रामीण

भैरुंदा क्षेत्र में बिना रॉयल्टी रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली का अवैध परिवहन लगातार जारी है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ट्रैक्टर-ट्रॉली ग्रामीण मार्गों से रेत का परिवहन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से प्रभावी कार्यवाही नहीं की जा रही है। खनिज विभाग एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा मात्र खानापूर्ति की कार्यवाही की जाती है, लेकिन वह केवल औपचारिकता तक सीमित रहती है। यही कारण है कि अवैध ट्रैक्टर-ट्रॉली रेत परिवहन पर अब तक प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है। पूर्व में भी भैरुंदा क्षेत्र के एक गांव में रेत से भरा एक ट्रैक्टर-ट्रॉली अनियंत्रित होकर एक दुकान में घुस गया था। उस घटना के बाद ग्रामीणों ने गांव के रास्तों से रेत से भरे वाहनों के आवागमन पर रोक लगाने की मांग की थी, रॉयल्टी के बिना रेत का परिवहन कर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा रहा है। कार्यवाही से बचने के लिए ट्रैक्टर चालक मुख्य मार्गों की बजाय ग्रामीण सड़कों का उपयोग करते हैं। अवैध रेत परिवहन में लगे कई ट्रैक्टर चालकों के पास ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता है। इसके अलावा ट्रैक्टरों के दस्तावेज भी पूर्ण नहीं होते। कई वाहनों के आवश्यक कागजात, जैसे पंजीयन, फिटनेस, बीमा या अन्य जरूरी दस्तावेज अधूरे होने के बावजूद वे सड़कों पर बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं। और बेरोकटोक ट्रैक्टर-ट्रॉली चलाकर ग्रामीण सड़कों पर फर्राटा भर रहे हैं। इससे न केवल यातायात नियमों का उल्लंघन हो रहा है, बल्कि राहगीरों और ग्रामीणों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ रही है। स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की गतिविधियों की जानकारी ट्रैक्टर चालकों तक पहले ही पहुंच जाती है। व्हाट्सएप ग्रुपों के माध्यम से कार्यवाही ओर अधिकारियों की लोकेशन साझा की जाती है, जिससे अवैध परिवहन करने वालों को बचने में आसानी होती है।

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