अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरूंदा – बुधनी विधानसभा क्षेत्र के किसान इस समय यूरिया खाद के लिए जद्दोजहद कर रहे हैं। जैसे ही बारिश के बाद मौसम खुला, खेतों में खाद की जरूरत महसूस होने लगी, लेकिन सरकारी व्यवस्था इसके लिए तैयार नहीं दिखी। बुधनी के भेरूंदा तहसील के ग्राम निपानिया सहकारी समिति में तो हालात ऐसे हो गए, कि किसानों ने सुबह से पासबुक की लाइन लगा दी, फिर भी 05 घंटे बाद भी खाद नहीं मिल सका।

10 दिन बाद पहुंचा ट्रक, किसान टूट पड़े –
ग्राम निपानिया सहकारी समिति के अनुसार, 10 से 12 दिन के लंबे इंतजार के बाद यूरिया का एक ट्रक यहां पहुंचा है। जिसकी सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में किसान पासबुक लेकर समिति कार्यालय पहुंच गए, लेकिन ट्रक में सिर्फ 540 बोरी यूरिया थी, जो ज़रूरत के मुकाबले बेहद कम है। समिति द्वारा 350 टन यूरिया की मांग की गई थी, पर अब तक सिर्फ 75-80 टन ही उपलब्ध हो सका है।
डीएपी की भी भारी कमी –
खाली गोदाम सिर्फ यूरिया के लिए नहीं हैं, बल्कि डीएपी की कमी भी किसानों को परेशान कर रही है। समिति ने 250 टन डीएपी की मांग की थी, लेकिन अब तक सिर्फ 130 टन ही प्राप्त हुआ है। यह स्थिति तब है जब खेती का सबसे व्यस्त और जरूरी मौसम चल रहा है।

पासबुक की कतार में इंतजार, भगदड़ की आशंका –
यूरिया की सीमित बोरियों के कारण हर किसान को केवल एक बोरी देने का निर्णय लिया गया है। किसानों ने खुद स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए पासबुक की लाइन बनाकर इंतजार करना शुरू किया, जिससे कोई विवाद या भगदड़ न हो। लेकिन इंतजार के बावजूद अधिकांश किसानों को खाद नहीं मिल सका।
विपक्ष का हमला, सरकार पर गंभीर आरोप –

कांग्रेस नेता विक्रम मस्ताल ने इस संकट पर सरकार को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा कि, “यह है भाजपा का किसानों की आय दोगुनी करने का फार्मूला। एक ओर व्यापारी ट्रकों से यूरिया ले जा रहे हैं और बाजार में कालाबाजारी हो रही है, जबकि सरकारी समितियों के गोदाम खाली पड़े हैं। किसानों को लाइन में लगकर भी खाद नहीं मिल रही। अगर यही हाल केंद्रीय कृषि मंत्री के क्षेत्र में है तो देशभर का हाल क्या होगा?”
