किसानों ने कहा सर्वे के नाम पर भी हो रही रस्म अदायगी…
अत्यधिक बारिश का असरः सोयाबीन के पौधों में नहीं बैठ पाया फल…
अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरूंदा– प्राकृतिक प्रकोप ने क्षेत्र के किसानों की कमर एक बार फिर तोड़कर रख दी हैं। क्षेत्र में सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है, और किसानों ने खेतों में खड़ी सोयाबीन फसल पर ट्रैक्टर व कल्टीवेटर चलाना शुरू कर दिया है। सोयाबीन फसल की बोवनी सहित अन्य संसाधनों पर प्रत्येक किसान ने हजारों रुपए की राशि खर्च की थी। लेकिन मौसम ने किसानों की मेहनत पर पूरी तरह पानी फेर दिया। नतीजा यह है कि सोयाबीन फसल में फली नहीं आने के कारण किसानों को अपने खेतों को खाली करना पड़ रहा है।
किसानों की माने तो सरकार और बीमा कंपनी गुमराह करने का काम कर रही है –

वहीं कहीं गांव में तो फसल क्षति का आकलन भी सहीं ढंग से नहीं हो रहा है। ऐसे किसानों को उनकी बर्बाद फसल का सहीं मूल्य भी नहीं मिल पाएगा। हालांकि एसडीएम के द्वारा राजस्व, कृषि विभाग, पंचायत सचिव एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की एक सर्वे टीम तैयार करने के आदेश जारी किए हैं। तहसीलदार के मुताबिक सर्वे टीम हल्का बार पहुंचकर बर्बाद फसलों का जायजा ले रही है।
उल्लेखनीय है कि क्षेत्र में मौसम की मार के कारण एक बार फिर सोयाबीन की फसल बर्बाद हो चुकी है। बीते 05 वर्षों से भी अधिक समय से क्षेत्र के किसानों को सोयाबीन की फसल में लगातार नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसी का कारण है कि सोयाबीन का रकबा क्षेत्र में तेजी के साथ घट रहा है। एक समय में 60 से 65 हजार हेक्टेयर में सोयाबीन फसल की बोवनी की जा रही थी। लेकिन अब यह आंकड़ा घटकर 25 से 30 हजार हेक्टेयर पर आ गया है। मौसम का असर सोयाबीन की फसल पर सीधा पड़ रहा है। जिससे किसान अपने खेतों में खड़ी फसल पर ट्रैक्टर व कल्टीवेटर चलाने को मजबूर हैं।
खड़ी फसल पर चलाना पड़ रहा, कल्टीवेटर –

बुधवार को क्षेत्र के ग्राम झिरनिया के कई खेतों में किसान सोयाबीन की खड़ी फसल में ट्रैक्टर चलाते हुए दिखाई दिए। जिसका एक बिडीओ सोशल नेटवर्क पर वायरल हो रहा है। बताया जा रहा है कि हल्का नंबर 35 के निवासी मोहनलाल ने अपने खेत मे खड़ी हुई सोयाबीन की फसल पर ट्रैक्टर व कल्टीवेटर चलाने को मजबूर होना पड़ रहा है। किसान के मुताबिक क्षेत्र में अत्यधिक वर्षा होने के कारण सोयाबीन की फसलों में फल नहीं बैठ पाया हैं। जिससे हमें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। किसानों को अब रवि सीजन की तैयारी में जुटाना है। बर्बाद सोयाबीन फसल के कारण खेत तैयार नहीं हो पा रहे थे। किसान ने बताया कि पहले ही उनके द्वारा सोयाबीन फसल की तैयारी एवं उसकी बोवनी में हजारों रुपए की राशि खर्च की थी, लेकिन नतीजा शून्य रहा। अब नए सिरे से रवि फसल की तैयारी के लिए उन्हें फिर से राशि जुटाना होगी।
दिखावटी सर्वे, सरकार और बीमा कंपनी की झूठी तसल्ली –
झिरनिया सहित आसपास के गांव के किसानों ने सरकार और बीमा कंपनी पर झूठी तसल्ली का आरोप भी लगाया है। किसानों ने कहा कि सरकार ने किसानों को दिलासा देने के लिए दिखावटी सर्वे शुरू किया है। जिसका फायदा किसानों को मिल पाएगा इसकी संभावना नहीं है। किसान रामलाल, श्यामलाल व हरिश्चंद्र के मुताबिक पहले ही बीमा कंपनी किसानों के साथ छल कर चुकी है। कुछ दिन पूर्व बीमा की राशि कई किसानों के खाते में पहुंची है जो 500 से 1000 रूपये प्रति एकड़ के हिसाब से आई है। किसानों ने कहा कि बीमा कंपनी केवल फसल बीमा के नाम पर प्रीमियम जमा कराती है। और जब फसल क्षति की राशि देने का नंबर आता है तो उतनी राशि भी किसानों के खाते में नहीं पहुंचती, जितना किसानों ने फसल का प्रीमियम जमा किया है।
फसल क्षति का हो रहा सर्वे –
कलेक्टर के निर्देश पर फसलों की क्षति के आकलन के लिए हल्का बार टीम गठित की गई है। जिसमें राजस्व विभाग के पटवारी, कृषि विभाग के ग्राम सेवक, पंचायत विभाग के सचिव व उधानिकी विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की टीम बनाई गई है। टीम के द्वारा खेतों में पहुंचकर फसल क्षति का आकलन किया जा रहा है। जिसकी रिपोर्ट एसडीएम को सौंपी जाएगी।
