अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरुंदा – वन परिक्षेत्रों में वन माफिया के हौसले इस कदर बुलंद हो गए हैं कि अब उन्हें कानून और वर्दी का कोई खौफ नहीं रहा है। ताज़ा मामला लाड़कुई वन परिक्षेत्र की बीट निमोटा का है, जहाँ अवैध सागौन से भरे ट्रैक्टर को पकड़ने गए वन अमले पर माफिया ने कट्टा तान दिया और उन्हें ट्रैक्टर से कुचलने की कोशिश भी की।

जानकारी के मुताबिक बुधवार रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि गादल्या-सुआपानी वन क्षेत्र से अवैध सागौन की तस्करी की जा रही है। सूचना मिलते ही डिप्टी रेंजर देवेंद्र चौहान के नेतृत्व में वन विभाग की टीम रात्रि को लगभग 10:38 बजे नाकेदार अमर सिंह रावत, महेंद्र राजपूत, सूरजपाल, नरेंद्र राजपूत, अरुण पैठारी, अशोक सिंह बारेला व अन्य को साथ घेराबंदी के लिए पहुँची। जैसे ही टीम ने ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने का प्रयास किया। माफिया राजवीर जाट (निवासी निमोटा) और उसके साथियों ने वनरक्षकों पर देशी रिवाल्वर (कट्टा) तान दिया और जान से मारने की धमकी दी। इतना ही नहीं पकड़े जाने के डर से माफिया ने वनकर्मियों के ऊपर ट्रैक्टर चढ़ाने की कोशिश की। वनकर्मियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। लेकिन माफिया ने उनकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मारी, जिससे बाइक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। इस दौरान वन माफिया कट्टे की नोक पर दहशत फैलाकर जब्त किया गया सागौन से भरा ट्रैक्टर-ट्रॉली छुड़ाकर भागने में सफल रहे।
हालांकि, वन विभाग की मुस्तैदी से दो आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है। वन कर्मियों के मुताबिक ट्रैक्टर ट्राली में अनुमानित 80 से 90 हजार रुपए की सागौन मौजूद थी। वही इस मामले में वन विभाग लाड़कुई की ओर से तीन लोगो पर थाना भैरूंदा में विभिन्न धाराओ में नामजद रिपोर्ट प्रकरण दर्ज कराया गया है।
सवाल: आखिर कहाँ से आ रहे अवैध हथियार?
भैरूंदा तहसील और आसपास के क्षेत्रों में अवैध कट्टे और रिवाल्वर इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो रहे हैं? क्या पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है? आए दिन हो रही हिंसक घटनाओं के बावजूद हथियारों की सप्लाई चेन क्यों नहीं तोड़ी जा रही?
बिना सुरक्षा संसाधनों के वनकर्मी अपनी जान हथेली पर रखकर जंगलों की रक्षा कर रहे हैं, लेकिन माफिया के पास आधुनिक हथियार हैं।
