कोलार नदी पर जर्जर पुल की मरम्मत नहीं, निजी कंपनी ने कर दिया कार्य…
अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
भैरूंदा – जब जिम्मेदार विभाग आंख मूंद कर बैठे है, तब एक निजी कंपनी ने सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए, मिसाल पेश की है। बता दे कि बुदनी विधान सभा अंतर्गत भैरुंदा तहसील से करीब 15 किलोमीटर दूर कोलार नदी पर निजी कंपनी यूफोरिया माइंस एंड मिनरल्स कंसोर्टियम एवं पावर मैक प्रा.लि. द्वारा लगभग करीब 25 से 30 लाख रुपये की लागत से अस्थायी रास्ता तैयार किया गया है।

यह अस्थायी मार्ग करीब 500 मीटर लंबा है। जो ग्राम छिदगांव, बड़गांव, आंबा, बाबरी, डीमावर, खडग़ांव को तहसील मुख्यालय से जोड़ता है। वर्ष 2009 में यह पुल बना था। लेकिन अब यह पुल के पूरी तरह जर्जर हो जाने के बावजूद संबंधित विभाग द्वारा आज तक कोई मरम्मत नहीं कराई गई। जिससे ग्रामीणों को हर वर्ष बारिश के मौसम में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता था। कंपनी द्वारा खोपरा, मिट्टी, मुरम और गिट्टी डालकर चार लाइन का मार्ग बनाया गया है। साथ ही पानी की निकासी के लिए 24 पुलियों डाली गई है। कंपनी ने यह कार्य मात्र 24 घँटे में कर दिया। जिसके बाद अब कंपनी के इस कार्य की सराहना हो रही है। इस कार्य मे कंपनी के जनरल मैनेजर विनोद कुमार, मैनेजर दिनेश कुमार, मैनेजर रमेश अन्ना, राहुल रघुवंशी की महत्वपूर्ण भूमिका है। ग्राम पंचायत छिदगांव काछी के सरपंच उदयराम कुशवाह ने भी बताया कि नदी पर बना पुराना पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है, जिसे आवागमन में परेशानी होती है। वही रेत कंपनी ने रास्ता बनाया गया यह काबिलेतारीफ है।

वही कंपनी के जनरल मैनेजर विनोद कुमार ने बताया कि कोलार नदी पर बना पुल पूरी तरह खराब हो चुका है। ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए, कंपनी ने यह अस्थायी व्यवस्था की है। ताकि आवागमन बाधित न हो। उन्होंने बताया कि 2022 में भी कंपनी द्वारा इस मार्ग की मरम्मत कराई गई थी। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने से यह मार्ग हर साल बंद हो जाता है। जिससे ग्रामीणों को तहसील मुख्यालय पर जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। कंपनी की इस पहल से क्षेत्रवासियो ने राहत की सांस ली, और स्थानीय लोग इसकी सराहना कर रहे हैं, वहीं जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
