ब्राह्मण का संस्कार ही दूसरा जन्म है – पं. गुरुप्रसाद शर्मा

वैदिक रीति – रिवाज से हुई सहस्त्रबाहु भगवान परशुराम की पूजा अर्चना – संस्कार केंद्र पर एकत्रित हुआ विप्र समाज
अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
शुक्रवार को ब्राह्मण समाज के आराध्य देव सहस्त्रबाहु भगवान परशुराम की जयंती वैदिक रीति-रिवाज के साथ परशुराम संस्कार केंद्र पर मनाई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में विप्र समाज एकत्रित हुआ। प्रात: 09 बजे से संस्कार केंद्र पर भगवान की पूजा-अर्चना आचार्य नारायण प्रसाद शर्मा के सानिध्य में सम्पन्न हुई। समाज के वरिष्ठ पंडित गुरुप्रसाद शर्मा, अध्यक्ष पंडित नर्बदा प्रसाद शर्मा व पंडित गोपाल पटेल के द्वारा विधि-विधान के साथ पूजा की गई। इसके बाद भगवान की महाआरती कर प्रसादी का वितरण किया गया।

कार्यक्रम के दौरान सामाजिक बैठक भी सम्पन्न हुई, जिसमें कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा कर परशुराम संस्कार केंद्र में प्रमुख रूप से तीन संकल्प लिए गए, जिसमें सभी विप्र बालको को सनातन वैदिक संस्कृति का ज्ञान करना, संध्या वंदन कराने के लिए शिक्षा प्रदान करना, प्रतिदिन योगाभ्यास से शारीरिक विकास करना, व समाज के अविवाहित बालक बालिकाओं के लिए परिचय पत्रिका तैयार करने पर जोर दिया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विप्र समाज मौजूद था।

कार्यक्रम को संबोंधित करते हुए वरिष्ठ समाज सेवी पंडित गुरुप्रसाद शर्मा ने कहा कि ब्राह्मण का जन्म दो बार होता है, एक मां के गर्भ से और दूसरा संस्कार के द्वारा। उन्होंने कहा कि ब्राहमण कहलाने के अधिकारी हम तभी हैं जब हमारे अंदर संस्कार होंगे। हम चाहे किसी भी बड़े पद पर पहुंच जाए, लेकिन बाह्मण होने का प्रमाण हमारे पास संस्कारों से ही आयेगा। उन्होंने कहा कि मनुष्य में संस्कार नहीं तो वह शूद्र श्रेणी में है। एक ब्राह्मण की पहचान जनेउ, तिलक व कलावा से होती है। हमारी संस्कृति का सरंक्षण हमारा मूल कर्तव्य है ब्राह्मण के त्याग ने ही देश को आगे बढ़ाया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा की दधीचि ऋषि ने समाज हित में अपनी अस्थियां दान कर दी थी, इसलिए समय आने पर हमे देश के हित के लिए शस्त्र भी उठाने पड़े तो इसमें संकोच नहीं करना चाहिए। सच्चा ब्राह्मण वह है जिसने जन्म से नहीं बल्कि अपने श्रेष्ठ कार्यों से ब्राह्मणत्व प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि भगवान परशुराम व लक्ष्मण के बीच संवाद हुए को विस्तार से बताते हुए कहा कि भगवान का जन्म ही अन्याय व अत्याचार के दमन के लिए हुआ था। उनमें प्रमुख रूप से 09 गुण क्षमा करना, दान करना, माता-पिता को ईश्वर तुल्य मानना, संहारक व भक्ति के गुण शामिल थे। उन्होंने कार्यक्रम के उपरांत समस्त विप्र समाज का पुष्पवर्षा कर अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत किया।

परशुराम संस्कार केंद्र पर लायब्रेरी में होगा 18 हजार बुको का संग्रहण
समाज के सहयोग से भैरूंदा में एक विशाल परशुराम संस्कार केंद्र की स्थापना की गई हैं। यहां आने वाले दिनों में भगवान परशुराम जी के भव्य मंदिर में भगवान की प्राण-प्रतिष्ठा का कार्यक्रम सम्पन्न किया जायेगा। इसके अतिरिक्त यहां पर 18 हजार बुकों का संग्रहण लायब्रेरी में किया जा रहा हैं। आने वाले दिनों में केंद्र पर बच्चों को वैदिक कर्म, योगाभ्यास का लाभ भी प्राप्त होने लगेगा।

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