सेवानिवृत्त होने पर शाला ने किया सम्मान, दी भावभीनी बिदाई…

अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
भेरूंदा– “विदाई तो केवल एक पड़ाव है, आपके द्वारा सिखाए गए सबक और यादें हमेशा इस परिसर की दीवारों में गूंजती रहेंगी।”

स्थानीय शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में आज का दिन बेहद भावुक और यादगार रहा। शिक्षा के क्षेत्र में अपने जीवन के अनमोल वर्ष समर्पित करने के बाद, आज विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक वेदप्रकाश शर्मा शासकीय सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर शाला परिवार द्वारा एक भव्य विदाई और सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

बता दे कि अपने 62 वर्ष के सफल जीवन काल में से जीवन के अनमोल वर्ष शिक्षा को समर्पित करने वाले शिक्षक वेदप्रकाश शर्मा का सभी ने सम्मान किया। दिनांक 05 मई 1964 को ग्राम भादाकुई मे जनमें वेदप्रकाश शर्मा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा- कक्षा 01 से 08 शा.मा.शाला भादाकुई मे पूरी की, इसके उपरांत उच्च शिक्षा के लिए वह ग्राम लाड़कुई पहुंचे, यह कक्षा नौवीं से लेकर 11 तक की शिक्षा शासकीय हाई स्कूल लाड़कुई में ग्रहण की, वर्ष 1982 मे 11वीं उत्तीर्ण करने के पश्चात, उच्च शिक्षा एम.ए. समाज शास्त्र तथा व्यावसायिक शिक्षा वी.टी.आई. प्राप्त की, दिनाक 16 सितम्बर 1982 शा.मा.शाला भादाकुई मे प्रथम नियुक्ति प्राप्त की, वर्ष 1986 मे सहायक शिक्षक पद पर पदोन्नती हुई, अपने इस सेवा के दौरान 1996 में उनका स्थानांतरण शासकीय माध्यमिक शाला खरसानिया कर दिया गया, वही वर्ष 1998 मे अतिशेष के चलते पुनः शासकीय माध्यमिक शाला भादाकुई स्थानान्तर हुआ। वर्ष 2023 में उच्च श्रैणी शिक्षक के पद पर पदोन्नती प्राप्त हुई। जहाॅ 31 मई 2026 तक अपनी सेवाए देते हुए शा. हायर सेकेंडरी स्कूल भादाकुई से सेवानिवृत्त हुए।

समारोह की शुरुआत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके बाद, विद्यालय के प्राचार्य, साथी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने वेदप्रकाश शर्मा तिलक लगाकर, शॉल, श्रीफल, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर उनका आत्मीय सम्मान किया।

कार्यक्रम में उपस्थित वरिष्ठ जनो ने उनके कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि वेदप्रकाश शर्मा] ने न केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान दिया, बल्कि उन्हें जीवन जीने की कला और नैतिक मूल्य भी सिखाए। उनके अनुशासित जीवन और मिलनसार स्वभाव की कमी विद्यालय को हमेशा खलेगी। साथी शिक्षकों ने भी उनके साथ बिताए गए खट्टे-मीठे अनुभवों को साझा किया और बताया कि कैसे वे हर कठिन परिस्थिति में एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाते थे। वही कहा कि नौकरी की समयसीमा समाप्त हो सकती है, लेकिन एक शिक्षक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। उनका ज्ञान समाज को हमेशा आलोकित करता रहेगा।

अपने सम्मान और विदाई कार्यक्रम के दौरान भावुक होते हुए सेवानिवृत्त शिक्षक वेदप्रकाश शर्मा ने कहा— इस विद्यालय के प्रांगण और बच्चों के बीच बिताया गया हर एक पल मेरी जिंदगी की सबसे खूबसूरत पूंजी है। आज भले ही मैं सेवा से मुक्त हो रहा हूँ, लेकिन मेरा दिल हमेशा इस शाला और यहाँ के बच्चों के लिए धड़कता रहेगा। मुझे जो प्यार और सम्मान यहाँ मिला, उसके लिए मैं पूरे शाला परिवार का आजीवन आभारी रहूँगा।

समारोह के अंतिम चरण में सभी ने खड़े होकर करतल ध्वनि से उन्हें विदाई दी। शाला परिवार और गणमान्य नागरिकों ने उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और सुखद सेवानिवृत्त जीवन की मंगलकामना की। विदाई समारोह के बाद उन्हें ससम्मान उनके निवास स्थान तक छोड़ा गया। यह आयोजन इस बात का प्रतीक था कि जब कोई शिक्षक अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से निर्वहन करता है, तो विदाई का क्षण भी एक उत्सव बन जाता है।

इस अवसर पर विकासखंड शिक्षाधिकारी साक्षी जैन, ललित कीर, चंद्र शेखर शर्मा, संकुल प्राचार्य विजय नागर के साथ ग्राम के वरिष्ठ जन उपस्थित रहे।

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