वर्षो से जमे अधिकारी कर्मचारी, वन विभाग ने आज तक नही दिया ध्यान…

साठगांठ के चलते हजारों हैक्टेयर वन भूमि हुई कृषि भूमि में तब्दील…

– अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरुंदा
क्षेत्र में वन संपदाओं को बचाने व बढ़ाने में वन विभाग अपना महत्वपूर्ण रोल अदा करता है। इसके लिए वन विभाग के द्वारा बनाए गए सर्किल में नाकेदार, चौकीदार एवं डिप्टी रेंजरों की नियुक्ति की गई है। जिससे कि वन संपदा कटने से बच सके और इनका संरक्षण किया जा सके। लेकिन बुधनी, रेहटी व लाडक़ुई वन परिक्षेत्र में जिन नाकेदार, चौकीदार एवं डिप्टी रेंजरों को वनों को बचाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं सबसे बड़े भक्षक बने हुए है। इसका सबसे बड़ा कारण इन अधिकारियों, कर्मचारियों के वर्षो से ही एक ही स्थान पर जमा होना है। वर्षो से यह अपनी बीट का संचालन मनमाने तरीके से करते चले आ रहे है और इन्हें देखने वाला भी कोई नही है। ऐसे में वन संपदा बचने की बजाय लगातार खत्म होती जा रही है।

जिसके कई उदाहरण लगातार सामने आ रहे है। स्थिति यह है कि तीनों ही क्षेत्र में सैकड़ों हैक्टेयर वन भूमि पर आसानी के साथ कब्जा कर खेती की जा रही है। लेकिन इस मामले में वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी केवल मूक दर्शक बने हुए है। आखिर विभागीय अधिकारियों ने वर्षो से एक ही स्थान पर जमे कर्मचारियों का स्थानांतरण किए जाने की जहमत क्यों नही उठाई। वर्षो से जमे कर्मचारी वन परिक्षेत्र का संचालन भी मन माफिक करते चले आ रहे है। जिसका नतीजा यह है कि हजारों हैक्टेयर में फैली वन संपदा नैस्तोनाबूद हो चुकी है।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि विभागीय स्तर पर इस मामले में मॉनीटरिंग क्यों नही की जाती। रेहटी वन परिक्षेत्र में बने हुए सभी सर्किल में नाकेदार व डिप्टी रेंजरों को 8 से 15 वर्ष का समय एक ही सर्किल में हो चुका है। तो यही स्थिति लाडक़ुई वन परिक्षेत्र में भी बनी हुई है। आखिरकार विभागीय स्तर पर संज्ञान क्यों नही लिया जाता। कही न कही इस मामले में वन परिक्षेत्र के अधिकारी संलिप्त नजर आ रहे है।

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