– अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
मशहूर शायर जिगर मुरादाबादी का एक शेर है। “ये इश्क़ नहीं आसाँ इतना ही समझ लीजे, इक आग का दरिया है और डूब के जाना है” में से यदि इश्क़ हटाकर भैरूंदा से लेकर गोपालपुर मार्ग को रख लिया जाए तो यकीन मानिए इसमे आग से लेकर दरिया में डूबने तक के सारे अनुभव आपको मिल जाएंगे, क्योंकि मुख्यमार्ग में बड़े बड़े गड्ढे हो या घटिया निर्माण में डामर पिघलना हो या फिर सिप नदी का उखड़ता बॉक्स ब्रिज हो आपको बतादे ये हालात भी तब है जब दो-दो बार मार्ग का पेचवर्क हो चुका है।
दरअलस बुधनी से संदलपुर तक स्टेट हाइवे 22 की अब नेशनल हाइवे की घोषणा होने के बाद जितना लोगो को सुधार की उम्मीद थी, उतनी ही बदत्तर स्थिति होती जा रही है, जहां पर बुधनी से संदलपुर तक ही कही गड्ढे तो कही निर्माण कार्य कही ब्रिज तो कही ख़स्ताहाल सड़क मुसीबत बन लोगो के सामने खड़ी हुई है।
हालांकि अधिकारियों को कहना है कि नए निर्माण में समय लगेगा तब तक पेचवर्क से काम चलेगा, वही सबसे ज्यादा खस्ताहाल भैरूंदा से गोपालपुर तक है जिसमे से *बड़नगर से लेकर इटावा* तक मुख्यमार्ग में दोनों ओर से सड़क उखड़ गयी है जिससे दोनों ओर बड़े बड़े गड्ढे में बारिश के पानी भरने से गड्ढे नही दिखते हालत ये है कि अगर गलती से भी वाहन बड़े गड्ढे में चला जाये तो एक साइड वाहन आधा पानी मे दुब जाता है जिससे हादसों सहित गाड़ी में टूटफूट की चिंता बनी रहती है, ऐसे ही हाल *बोरखेड़ा से गिल्लोर* तक भी है। यहां गड्ढे तो कम है लेकिन घटिया निर्माण के बाद यहां डामर पिघलने से रोड एक साइड से टूटी हुई सी प्रतीत होती है जिसमे वाहन के अनबैलेंस होकर दुर्घटना के शिकार का डर रहता है, उसके आगे सिप नदी ब्रिज का निर्माण कार्य पूर्ण नही होने से उसी बॉक्स ब्रिज से निकलना पड़ रहा है। जो बनते से ही उखड़ने लगा था। लेकिन अब बारिश की बजह से पानी आने से आवागमन पूरी तरह बंद हो जाता है जहां पर यात्रा कर रहे लोगो का अतिरिक्त फेर लगाकर वैकल्पिक मार्ग से जाना पड़ता है वहा भी नदी आने से घंटो इन्तेजार के बाद भी मंजिल तक पहुचना मुश्किल होता है
क्या कहते है-
वैसे तो भैरूंदा से लेकर गोपालपुर तक ही स्थिति खराब है लेकिन उसमें भी सबसे खस्ताहाल सड़क है बड़नगर से लेकर इटावा तक जिसमे इतने बड़े बड़े गड्ढे हो गए, जिनमे से निकलना मुश्किल है और बारिश में उसमे पानी भराने से आप अंदाजा नही लगा सकते।
हर्षराज सिंह चौहान, बाइबोड़ी…
कहा गड्ढा है कहा सड़क है पता ही नही चलता और उसमें हादसों का भी डर बना रहता है जिसमे से रोज आने जाने बाले दोपहिया वाहनों के लिए तो मौत का सफर है जबकि इसका एक बार पेचवर्क हो चुका है लेकिन इतना घटिया निर्माण जिसकी इतनी जल्दी उखड़ जाएगा सोचा नही था और जब इसका पेचवर्क चल रहा था तब भी महीनों पत्थर डालकर पटक दिया फिर मिट्टी डालदी फिर वारिश हुई तो कई लोग इसमे हादसे का शिकार हुए वाहनों का निकलना मुश्किल था यानी कि जब नही बना था तब भी मुसीबत ओर अब जब पेचवर्क हो चुका तब भी मुसीबत।
मनोज खेर, ग्रामीण ईटावा…
बुधनी से लेकर भैरूंदा तक कि बात हो या भैरूंदा से लेकर गोपालपुर की मेरी एमपीआरडीसी के अधिकारियों से बात हुई है उन्हें बताया गया है कि अभी इस मार्ग को दुरुस्त किया जाए चलने लायक स्थिति में लाया जाए गड्ढे भरे जाए जिससे आवागमन में कोई परेशानी ना आये क्योंकि ये रोड अब नेशनल हाइवे में चला गया है जिससे आपको जल्दी ही फोरलेन हाइवे देखने को मिलेगा लेकिन उसमें समय लगेगा इसलिए इसे जल्द ही सुधार कर मार्ग को दुरुस्त कर लिया जाएगा।
रवि मालवीय, भाजपा जिला अध्यक्ष सिहोर…*
नगर क्षेत्र के ग्राम बड़नगर और इटावा के बीच में हाईवे रोड का निर्माण 03 माह पूर्व हुआ था, आज उस रोड पे डामर की जगह मिट्टी ही नजर आ रही है। जिसमे डेढ़, डेढ फिट गड्डे हो गए है। जिससे आने जाने वाले यात्री को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। भाजपा सरकार मे कितना भ्रष्टाचार है।
विक्रम मस्ताल शर्मा, कांग्रेस प्रत्याशी रहे,
ये मार्ग पहले स्टेट हाइवे में था लेकिन अब नेशनल हाइवे में चला गया है आने बाले समय मे फोरलेन सड़क तैयार होनी है लेकिन अभी एमपीआरडीसी ही इसकी देख-रेख कर रहे है बारिश में भी जल्द ही विभाग से बोलकर स्थिति को सुधारा जाएगा
मदन सिंह रघुवंशी, एसडीएम भैरूंदा…
