वनकर्मियों के साथ ड्यूटी के दौरान अभद्र व्यवहार करते हुए शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने वाले चार आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका न्यायाधीश रविन्द्र कुमार शर्मा क द्वारा खारिज कर दी गई।
इस मामले में न्यायालय ने तर्क दिया कि मामले में प्रथम दृष्टया आवेदकगण की संलिप्ता अपराध में दर्शित होती है, प्रकरण की परिस्थितियों को देखते हुये अभियुक्तगण की अग्रिम जमानत मंजूर नहीं की जा सकती।
विशेष लोक अभियोजक शिरीष उपासनी ने जानकारी देते हुए बताया कि बीते 28 दिसंबर को वन विभाग द्वारा थाने में लिखित आवेदन प्रस्तुत करते हुए बताया कि रात्रि 9 बजकर 40 मिनट पर वन भ्रमण के दौरान मुखबिर द्वारा झाली घाट पर नाले में 12 नग सागौन की सिल्ली जप्त कर शासकीय वाहन से वन परिक्षेत्र पहॅुचे। तभी अमले को सूचना मिली कि अवैध रूप से सागौन की सिल्लियों का परिवहन किया जा रहा है। वन अमला जब सुआपानी मार्ग से बगलीखेडा पहुंचा तो वाहन क्रमांक एमपी 41 सीए 9110 व एमपी 04 सीयू 8898 वाहन में से 6 से 7 व्यक्ति उतरकर अभद्र व्यवहार करने लगे और वन स्टाफ को डरा धमकाकर उनका मोबाईल भी तोड़ दिया और धमकी देने लगे की तुम लोग हमारी लकडी पकड़ते हो हम तुम्हे झूठे आरोप में फंसा देंगे।
इस दौरान रियाज पिता अब्दुल रज्जाक आयु 39 वर्ष, आमिन खान पिता गफूर खांन आयु 37 वर्ष, अनीस खान पिता शहीद खान आयु 36 वर्ष, नफीस मंसूरी पिता इस्माईल खान निवासी भैरूंदा द्वारा वन अमले के साथ अभद्र व्यवहार करते हुए, अभियुक्तगण के द्वारा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की गई, जिस पर से थाना भैरूंदा द्वारा विभिन्न धाराओं में अपराध पंजीबद्ध कर प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
इस मामले में उक्त लोगो के द्वारा अग्रिम जमानत का आवेदन द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश रविन्द्र कुमार शर्मा के न्यायालय में पेश किया था। जहां जमानत याचिका निरस्त की गई। शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजक राजेश गुप्ता द्वारा की गई।
