ग्राम इटावा के माणक गार्डन में हुई, एक अनोखी शादी…

भैरूंदा- पिता की चिंता अब हुई खत्म: तहसील भेरूंदा के ग्राम इटावा के माणक गार्डन में सत्संग के बाद हुआ अनोखा दहेज़ मुक्त विवाह, जिसने समाज को दिया प्रेरणादायक संदेश।

सत्संग के बाद हुआ, विवाह…

 जब भी बेटियों की शादी का प्रश्न आता है, एक पिता के चेहरे पर चिंता की रेखाएँ साफ दिखाई देती हैं। समाज में फैली दहेज प्रथा ने बेटियों को बोझ समझने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन वहीं दूसरी ओर, संत रामपाल के तत्वज्ञान से प्रेरित विवाह एक नई सोच और समाधान लेकर आ रहे हैं – जहाँ बेटी बोझ नहीं, वरदान बन जाती है।

ऐसा ही एक प्रेरणादायक विवाह हाल ही में ग्राम इटावा के माणक गार्डन में देखने को मिला, जिसने उपस्थित लोगों को भाव-विभोर कर दिया।

समाज को प्रेरित करने कहा- “पैसा नहीं, आपकी बेटी चाहिए”
इस विवाह समारोह में अजय मीना, सुपुत्र रामसिंह मीना, निवासी ग्राम ढोबा, तहसील भेरूंदा, जिला सीहोर ने दहेज का कड़ा विरोध करते हुए समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की।
उन्होंने कहा- “हमें दहेज नहीं चाहिए, हमें आपकी बेटी चाहिए।” उनके इस संकल्प को सुनकर पूरे समारोह में तालियों की गूंज उठी और लोगों ने कहा- “काश हर घर में ऐसा दामाद मिले।”

कैसा था, यह अनोखा विवाह ?

दूल्हा और दुल्हन सादे वस्त्रों में, संत रामपाल की तस्वीर के सामने बैठे। हाथ में रक्षा सूत्र बांधते हुए, असुर निकंदन रमैनी के माध्यम से मात्र कुछ मिनटों में विवाह संपन्न हो गया। ना कोई पंडित, ना हवन, ना बैंड बाजा, ना हल्दी मेहंदी की रस्में, ना आतिशबाजी ओर ना ही कोई फिजूलखर्ची। यह विवाह पूरी तरह सादगीपूर्ण, आध्यात्मिक और शुद्ध सामाजिक संदेश के साथ सम्पन्न हुआ। वही 33 कोटि देवी-देवताओं का आवाहन किया गया, जो इस पवित्र अवसर के साक्षी बने।

समाज में बदलाव की जरूरत-

आज जब दहेज प्रथा के कारण कई परिवार कर्ज में डूब जाते हैं और बेटियाँ ससुराल में प्रताड़ित होकर आत्महत्या जैसे रास्ते चुनती हैं, ऐसे में संत रामपाल के तत्वज्ञान से प्रेरित यह विवाह समाज के लिए एक नई दिशा प्रदान करता है, ऐसे विवाह कार्यक्रम समाज को वास्तविक धर्म और सद्गुणों की ओर वापस ले जाने का कार्य कर रहे हैं।

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