किसान हित में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की महत्वपूर्ण पहल…

किसानों के साथ अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा- केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान

शिवराज सिंह चौहान की कड़ी नाराजगी के बाद मध्य प्रदेश में घटिया कीटनाशकों पर सख्त कार्यवाही…

राजस्थान लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने कंपनी का विनिर्माण लाइसेंस निलंबित किया…

शिकायत निवारण एवं हेल्पलाइन, किसानों के लिए टोल-फ्री हॉटलाइन – 1800-180-1551

अमित शर्मा, लाड़कुई/भैरूंदा
Bhopal – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में कृषि मंत्रालय ने हाल के दिनों में तेज़ और ठोस कार्रवाई कर यह साबित किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में किसान हित सर्वोपरि है। अन्नदाता किसान भाइयों-बहनों को घटिया खाद, बीज और कीटनाशक आदि उत्पाद बेचने वालों पर सख्ती और किसानों को राहत दिलाने का हरसंभव प्रयास जारी है। शिवराज सिंह चौहान का स्पष्ट कहना है कि किसानों के साथ अन्याय किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। किसानों के मामले में मोदी सरकार अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है।

कृषि मंत्रालय की त्वरित कार्यवाही और किसान हित में उठाए गए कदम –

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान लगातार किसानों से संवाद कर रहे हैं और उनकी समस्याओं के समाधान हेतु सक्रिय कदम उठा रहे हैं। हाल के दिनों में शिवराज सिंह चौहान की कड़ी नाराजगी के बाद दो मुख्य मामलों पर महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई है:

1. मध्य प्रदेश में घटिया कीटनाशक पर कार्यवाही
मध्यप्रदेश के जिलों विदिशा (ग्रामीण), देवास (कन्नौद) और धार (बदनावर) से सोयाबीन की फसल को “क्लोरिम्यूरॉन एथिल 25% WP” नामक शाकनाशी से नुकसान होने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रभावित किसानों से मुलाकात की और कृषि विभाग को तत्काल जांच कर सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए।
जांच में लिए गए 20 नमूनों में से 06 नमूने घटिया पाए गए। इसके आधार पर डिफॉल्टर कंपनी मेसर्स एचपीएम केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स, नई दिल्ली के विरुद्ध तीन जिलों में FIR दर्ज की गई। विदिशा और देवास जिले के 9 डीलरों के लाइसेंस रद्द किए गए, साथ ही देवास में कंपनी के गोदाम का लाइसेंस भी रद्द किया गया।
केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की सिफारिश पर, राजस्थान के लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने भी दिनांक 19 अगस्त 2025 को उक्त कंपनी का विनिर्माण लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

2. जैव-उत्तेजक (Biostimulants) उत्पादों का विनियमन
वर्ष 2021 की अधिसूचना के तहत जैव-उत्तेजकों को उर्वरक नियंत्रण आदेश (FCO), 1985 में शामिल किया गया। उद्योग को व्यवस्थित संक्रमण का अवसर देने के लिए अस्थायी (अनंतिम) पंजीकरण दिया गया था, लेकिन माननीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के व्यापक हित में यह पंजीकरण 16 जून 2025 के बाद आगे नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। 17 जून 2025 से सभी अनंतिम पंजीकरण अमान्य हो गए हैं। 

उर्वरक नियंत्रण आदेश (एफसीओ), 1985 में जैव-उत्तेजक उत्पादों को शामिल किए जाने से पहले, बाजार में लगभग 30 हजार उत्पाद उपलब्ध थे। किसानों को पता ही नहीं होता था कि इनकी गुणवत्ता क्या है, केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किसानों की भलाई के लिए उठाए गए सख्त कदमों के बाद अब केवल 146 जैव-उत्तेजक उत्पाद ही अनुसूची-VI एफसीओ, 1985 में अधिसूचित किए गए हैं और शेष निर्माताओं/आयातकों को पूरी तरह से गुणवत्ता मानकों का पालन करना होगा। अन्यथा, कोई जैव-उत्तेजक उत्पाद बिक नहीं सकेंगे।

3. शिकायत समाधान और किसानों हेतु हेल्पलाइन
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दिशा-निर्देश पर किसानों की सुविधा के लिए किसान कॉल सेंटर टोल-फ्री नंबर 1800-180-1551 जारी किया है।

22 अगस्त 2025 तक इस कॉल सेंटर पर कुल शिकायतें इस प्रकार से दर्ज हुईं: उर्वरक संबंधी शिकायतें – 2501, कीटनाशक संबंधी शिकायतें – 52 और बीज संबंधी शिकायतें – 105, ये प्राप्त सभी शिकायतें तत्काल संबंधित राज्यों को भेजी गई हैं और उन पर कार्रवाई जारी है।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देशों पर कृषि मंत्रालय ने हाल ही में घटिया कीटनाशकों पर कठोर कार्रवाई की है तथा जैव-उत्तेजकों को वैज्ञानिक ढंग से विनियमित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। सरकार किसानों की हर समस्या पर त्वरित और प्रभावी कार्यवाही हेतु पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

विकसित कृषि संकल्प अभियान –

इसी तरह, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा लैब टू लैंड के आह्वान पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर विकसित कृषि संकल्प अभियान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य हर साल खरीफ और रबी के दौरान देश के किसानों को आधुनिक, वैज्ञानिक एवं सतत कृषि पद्धतियों की जानकारी देना है। यह अभियन खरीफ के पूर्व काफी सफलतापूर्वक चलाया गया, जिससे किसानों को समय रहते मार्गदर्शन और प्रशिक्षण मिला। 15 दिवसीय इस अभियान में 723 ज़िलों के 65 हजार से अधिक गाँवों के 1.3 करोड़ से ज्यादा किसानों को जोड़ा गया।

अब रबी फसलों की बुवाई से पहले फिर से 03 अक्टूबर से 18 अक्टूबर तक पुनः यह देशव्यापी अभियान आयोजित किया जाएगा और किसानों को फसल उत्पादन, मृदा स्वास्थ्य और संसाधन प्रबंधन के बारे में जागरूक एवं सक्षम बनाया जाएगा।

इस अभियान का आयोजन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), राज्य कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और किसान उत्पादक संगठनों (FPO) आदि के माध्यम से किया जाता है। इसके तहत, क्षेत्रीय स्तर पर वैज्ञानिकों, अधिकारियों और प्रगतिशील किसानों की टीम बनाकर किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक, नई बीज किस्में, कीट नियंत्रण, सिंचाई, पोषण प्रबंधन आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसका उद्देश्य भारत को जलवायु सहिष्णु, विज्ञान-समर्थित और किसान-केंद्रित कृषि की दिशा में आगे बढ़ाना है, जिससे फसलों की उत्पादकता, जल, और उर्वरक संसाधनों का स्मार्ट प्रबंधन हो और किसान सशक्त बन सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »
error: Content is protected !!