शासकीय भूमि पर वर्षो से काबिज ग्रामीणों को किया बेदखल, 34 करोड़ से अधिक की लागत का छात्रावास निर्माण …

– अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
भैरुंदा तहसील के अंर्तगत आने वाले आदिवासी ग्राम झाली में वर्षो से गरीब ग्रामीणों द्वारा कब्जा कर राजस्व की भूमि पर खेती कर अपना जीवन यापन किया जा रहा था।

जिस पर राज्य सरकार द्वारा 490 आदिवासी छात्राओ के पढ़ने एवं रहने के लिए छात्रावास के निर्माण के लिए 15 एकड़ भूमि की आवश्यकता थी, जो की ग्रामीण अपना कब्जा की भूमि छोड़ने के लिए तैयार नही थे। जिसको लेकर निर्माण कर्ता ठेकेदार की शिकायत पर कलेक्टर सीहोर के निर्देश पर भेरूंदा नायब तहसीलदार, पटवारी, आरआई राजस्व, पुलिस बाल के साथ झाली पहुंचे और ग्रामीणों से शासकीय भूमि मुक्त करवाकर निर्माण कर्ता ठेकेदार के सुपुर्द किया।

ग्रामीण ने किया हंगामा…

दरअसल जहां ग्रामीणों द्वारा अवैध तरीके से कब्जा किया गया, वह करीब 08 एकड़ भूमि है। यहां शासन से स्वीकृत से 34 करोड़ रुपए की लागत से आदिवासी छात्रावास का निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन अतिक्रमण किए जाने से छात्रावास निर्माण के लिए भूमि कम होने से प्रशासन द्वारा ग्रामीणो को शासकीय भूमि से हटाया गया।

वही मौके पर राजस्व अमला पहुंचा ओर अतिक्रमण को हटाने के दौरान कब्ज़ा धारी ग्रामीण के परिजन पुरूष, महिला व बच्चो ने बहुत प्रयास किया, कि वर्षो से जिस जमीन पर काबिज होकर खेती करते आ रहे है, उसको बचाने के लिए महिलाएं बच्चे जेसीबी मशीन के पंजे के सामने बार-बार आए, लेकिन राजस्व दल ने आने वाले समय में 490, छात्राओं के भविष्य को देखते हुए, ग्रामीणों को बेदखल कर शासकीय भूमि ठेकेदार के सुपुर्द की गई।

संदीप गौर, नायब तहसीलदार भेरुंदा

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