आखिर नहीं थम रहा जंगल की अवैध कटाई का सिलसिला…

सूरज ढलते ही बुलंद हौसले के साथ सरेआम पहुंचती है, अपनी मंजिल तक अवैध इमारती लकड़ी…

-अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
रेहटी तहसील के चकल्दी, बनियागांव, काकरिया क्षेत्र से बेधड़क बुलंद हौसले के साथ सरेआम लाते हैं इमारती लकड़ी ओर फर्नीचर मार्ट तक पहुंचाई जाती है जो की वन विभाग की सीमा के बिल्कुल सटे ही फर्नीचर मार्ट लगा ने की परमिशन प्रशासन द्वारा दी गई, जो आज भी वही हैं। लेकिन क्षेत्र मे ऐसे भी लोग है, जो बिना परमिशन के लकड़ी के फर्नीचर का काम कर रहे है।

जंगल मे लकड़ी काटने का तरीका-
एक ग्रुप की टोली बनाई जाती है जिसमें 15 से 20 लोग सामिल होते हैं, पांच लोग रेकी करते हैं, बाकी लोग जंगल में जाते हैं, उसी समय में डीजल मशीन लेकर आते है, जो कुछ ही मिनट में बड़े से बड़े सागौन का पेड़ को धाराशाही कर देती है, जिसे मौजूद लोगो द्वारा आपस में बांट लेते हैं। वही सूत्र बताते इसकी पूरी खबर संबंधित विभाग के कर्मचारी को होती है, लेकिन मिली भगत के चलते कार्यवाही नही की जा रही है। ओर कभी-कभार इक्का-दूक्क कार्यवाही कर अपनी पीठ थप-थपा लेते है।

रक्षक ही बना रहे हैं भक्षक-
जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो जंगल नही कटने का सवाल ही पैदा नहीं होता। क्योंकि जब यह सारे आम लकड़ी सप्लाई करने जाते हैं और वन विभाग की टीम पकड़ने जाती है उससे पहले ही वन विभाग की लोकेशन उपलब्ध हो जाती है, कि वन विभाग की गाड़ी किस दिशा से आ रही है, तो यह सब सचेत हो जाते हैं, आज के डिजिटल युग में वन माफिया ज्यादा शातिर है, ओर इसी का फायदा उठाकर अवैध सागौन की कटाई की जा रही है।

पहुंचाई जा रही, फर्नीचर मार्ट तक-
वही सूत्र बताते हैं कि वन कर्मी की मिली भगत से चकल्दी क्षेत्र से नसरुल्लागंज, रेहटी तक सागौन का अवैध परिवहन इमारती लकडी पहुंचाई जा रही है, ओर इस काम के बदले वन कर्मी मोटी रकम वसूल रहे है इतना ही नही वन परिक्षेत्र मे अतिक्रमण के नाम पर ही राशि के लेन-देन की बाते सामने आ रही है, ओर वही वन भूमि का रकबा कम होने से साफ जाहिर हो रहा है कि यह खेल बडे स्तर पर मिली भगत कर खेला जा रहा है।

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