मामला वनों की अवैध कटाई का…
– अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
पूर्व मुख्यमंत्री एवं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बुधनी विधानसभा में पर्यावरण को नैस्तोनावूद करते हुए वनों की अवैध कटाई का मामला लगातार चर्चाओं में बना हुआ है। मीडिया के द्वारा इस मामले को प्रमुखता के साथ उठाया गया है। जंगलों की परिधि के अंदर ही संचालित होते फर्नीचर मार्ट, कीमती सागौन की लड़कियों का अवैध परिवहन, हरे भरे पेड़ों की प्रतिदिन दी जा रही बलि, हजारों हेक्टर वनभूमि पर दबंगो व ग्रामीणों का कब्जा जैसे कई बड़े मामले बुधनी, रेहटी, लाड़कुई वन परिक्षेत्र में उभर कर सामने आए हैं। लेकिन वनों का संरक्षण करने वाले वन विभाग व वन विकास निगम के द्वारा कार्यवाही के नाम पर रस्म अदाएगी का खेल वर्षों से जारी है। लगातार वनों का विनाश होता जा रहा है लेकिन इस बड़े स्केम को रोकने वाला कोई नहीं है। अधिकारी, जनप्रतिनिधि, व्यापारी, आमजन, समाज सेवी, प्रबुद्धजन वनों के संरक्षण, पर्यावरण को बचाने की सिर्फ बातें करते हैं। लेकिन हकीकत में आंखों के सामने हो रही वनों की कटाई को रोकने की हिम्मत कोई नहीं करता। जिसका नतीजा यह है कि हजारों एकड़ में फैला वन क्षेत्र बर्बादी की कगार पर पहुंच चुका है। वनों को संरक्षण देने वाले वनवासी व अधिकारी कहां है जो अपने छोटे से लालच के चक्कर में लाखों लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस मसले पर मीडिया ने जब वनों की हकीकत को जानने के लिए जमीनी प्रयास शुरू किया तो स्थितियां विकराल देखने को मिली।
समाचारों के लगातार प्रशासन के बावजूद भी अब क्षेत्र का ही नहीं बल्कि जिले का वन अमला भी इस मामले को दबाने में जुटा हुआ है। नतीजा यह है कि अभी भी अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर ही वनों का संरक्षण कर रहे हैं। वहीं कई अधिकारी तो पिछले कई दिनों से ऑफिस पहुंच ही नहीं रहे। ऐसी स्थिति में वनों के संरक्षण को लेकर की जा रही अपील और कारगर प्रयास कैसे हो सकेंगे। जब वनों के संरक्षण कर्ता ही अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं तो फिर समझा जा सकता है कि इस मामले में अधिकारी कार्यवाही नहीं बल्कि रस्म अदाएगी करना ज्यादा उचित समझ रहे हैं।
जांच के लिए दल गठित लेकिन कार्यवाही शून्य-
मीडिया की खबरों के बाद जिले के वन परिक्षेत्र अधिकारी ने रेहटी व लाड़कुई के वनों की जांच करने के लिए दल का गठन किया है। लेकिन बुधनी के वनों की जांच को लेकर कोई संज्ञान नहीं लिया है। लगभग एक सप्ताह का समय जांच दल का गठन किए हो चुका है। परंतु अभी तक कार्यवाही शून्य नजर आ रही है। हालांकि बुधनी एसडीओ सुक्ति ओसवाल ने शनिवार को वन अमले को जांच के लिए चकल्दी क्षेत्र में रवाना किया और कुछ देर अमला जांच के नाम पर रुका उसके बाद वहां से वापस रवाना हो गया।
इस मामले में डीएफओ मगन सिंह डाबर ने जल्द ही जांच करने की बात कही है। चूंकी सवाल यह उठता है कि आखिर जांच में देरी का कारण क्या। सवाल यह भी खड़े हो रहे हैं कि क्या जांच में देरी किए जाने के नाम पर वन परिक्षेत्र अधिकारी अपने कागजों को दुरुस्त करने में जुटे हुए हैं? जिससे कि वह जांच में कागजों के हिसाब से अपने आप को सही साबित कर सके।
जंगल परिधि में संचालित फर्नीचर मार्ट व आरा मशीनों की जांच अभी भी संदेह के घेरे में-
केवल रेहटी ही नहीं बल्कि पूरे वन परिक्षेत्र में जंगल की परिधि के अतिरिक्त नगरीय व ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित हो रहे फर्नीचर मार्ट व आरा मशीन संदेह के घेरे में बनी हुई है। जंगल परिधि में संचालित हो रहे है फर्नीचर मार्ट को लाइसेंस नियमों के मुताबिक दिए गए, इस बात का जवाब देने के लिए भी परिक्षेत्र के अधिकारी तैयार नहीं है। जिसमें बड़ा मामला रेहटी वन परिक्षेत्र से निकलकर सामने आ रहा है। चकल्दी यहां पर संचालित आरा मशीनो की समय- समय पर जांच की गई, यह भी संदेहस्प्रद बनी है। आखिर विभाग के द्वारा इस बड़े मुद्दे पर ध्यान देते हुए, मीडिया को जानकारी देने में आनाकानी क्यों की जा रही है। नगरी क्षेत्र का ग्रामों में भी अवैध रूप से सागौन की लड़कियों का खेल रात के अंधेरे में निरंतर जारी है। फिर विभाग वनों की कटाई के मामले में कार्यवाही को लेकर लापरवाही का कारण क्या है।
