– अमित शर्मा, लाड़कुई/भेरूंदा
सरकार के द्वारा आगामी दिनों में 05 करोड़ पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसके तहत पूरे प्रदेश में पौधारोपण कर पर्यावरण को बढ़ावा दिए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने स्वयं इस अभियान की शुरूआत कर दी है। जिसके तहत अब पूरे प्रदेश में वृहद स्तर पर पौधारोपण होगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर एक पेड़ माँ के नाम अभियान के तहत हरियाली को बढ़ाने का कार्य किया जाएगा। दूसरी और बड़ा सवाल यह है कि वर्षों से जो पेड़ जंगल में खड़े है उनकी बलि को रोकने का काम भी सरकार किस स्तर पर करेगी। पर्यावरण को बढ़ाने के लिए हो रहे प्रयास में प्रदेश का हर नागरिक कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है, लेकिन जिस तरह से हजारों किलोमीटर के दायरे में फैले जंगलों को काटने का काम किया जा रहा है, वह पर्यावरण को बचाने की श्रेणी में कब आएगा।
कुछ ऐसी ही स्थिति बुधनी विधान सभा क्षेत्र के जंगलों में देखने को मिल रही है। बेदर्दी के साथ हरे भरे पेड़ों पर कुल्हाड़ियां चलाई जा रही है। लेकिन इन्हें रोकने वाला कोई नही है। बुधनी, रेहटी व लाड़कुई वन परिक्षेत्र में जिस तरीके से वनों का दोहन हो रहा है वह निश्चित ही मौसम परिवर्तन में अपना महत्वपूर्ण रोल अदा कर रहा है। वनों को बचाने के अभियान में मिडिया के द्वारा लगातार अपनी मुहिम चलाई जा रही है।
जिसका नतीजा यह हुआ कि लाड़कुई वन परिक्षेत्र में वन भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने तथा पौधारोपण अभियान की शुरूआत की गई। हालांकि यह काम अभी निचले स्तर पर शुरू हो सका है लेकिन इसे जन आंदोलन बनाते हुए व्यापक स्तर पर ले जाने की आवश्यकता है। यदि हम अपने मकसद में कामयाब होते है तो निश्चित ही पर्यावरण को बचाने की दिशा में यह इस क्षेत्र में अभी तक का सबसे बड़ा कदम होगा। वनों को कटने से रोकने में जिम्मेदार अधिकारी ही नाकामयाब साबित हुए है। स्थिति यह है कि जिले व वन परिक्षेत्र में बैठे अधिकारी ही वन अधिनियम के संबंधों में पूरी जानकारी देने से कतरा रहे है। ऐसा लगता है कि इन अधिकारियों ने वन अधिनियम का राज पत्र ही नही पढ़ा। जिसके कारण वह सवाल पूछे जाने पर अनभिज्ञता जाहिर करते है। तीनों ही वन परिक्षेत्र में यह नजारा देखने को मिला है।
हालांकि अब वनों को बचाने की दिशा में बड़ा कदम कब उठेगा यह देखना लाजमी होगा। जिस तरह से वन परिक्षेत्र के दायरे में ही फर्नीचर मार्ट के नाम पर आरा मशीन व व्यवसायिक प्रतिष्ठान संचालित हो रहे उन्हें किस आधार पर अनुमति दी गई, इस संबंध में भी कोई जानकारी स्पष्ट नही हो सकी है। वही अधिकारी से जानकारी मांगी गई, लेकिन जानकारी देने के नाम पर सिर्फ अपने दिन आगे बड़ा रहे है।
